मीटर रीडिंग कम कर खेल करने वालों के खिलाफ पावर कॉर्पोरेशन के अफसरों ने शिकंजा कसने शुरू कर दिया है। ‘अमर उजाला’ ने 17 मई के अंक में ‘पावर कॉर्पोरेशन को चूना लगा रहे मीटर रीडर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की। रीडिंग में खेल को देखते हुए बुधवार को एक मशीन को जब्त कर उससे संबंधित कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से हटा दिया गया है।
मीटर रीडिंग के नाम पर किस तरह गड़बड़ झाला चल रहा है। इसकी पड़ताल के लिए अधीक्षण अभियंता ने दो सदस्यीय टीम गठित कर तीन दिन के अंदर जांच रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया है।
मीटर रीडिंग का बिल निकालने के लिए पावर कॉर्पोरेशन ने लखनऊ की प्राइवेट कंपनी विस्प को ठेका दे रखा है। इसी कंपनी के कर्मचारी (मीटर रीडर) मीटर रीडिंग का बिल निकालने का काम करते हैं। मशीनों के जरिए ज्यादा बिल को कम करने का खेल किया जा रहा है।
इस मामले को ‘अमर उजाला’ ने 17 मई के अंक में ‘पावर कॉर्पोरेशन को चूना लगा रहे मीटर रीडर’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इस खबर को गंभीरता से लेते हुए अधीक्षण अभियंता ने पूरे मामले में विस्प कंपनी के मैनेजर संग्राम सिंह को तलब किया और मामले को तत्काल दिखवाने को कहा।
अधीक्षण अभियंता की सख्ती पर कंपनी के मैनेजर ने तत्काल प्रभाव से एक मशीन को जब्त कर लिया और उस पर काम करने वाले मीटर रीडर मनोज श्रीवास्तव को हटा दिया। एक मशीन में औसतन 1500 उपभोक्ताओं को मीटर रीडर बिजली बिल देता है।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर मामले उसी मशीन से संबंधित थे, जिसके कर्मचारी को हटाया गया है। करीब 20 मशीनों से मीटर रीडर बिल निकालने का काम करते हैं। माना जा रहा है कि इस कार्य में बिना पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारी या फिर कर्मचारी की मिलीभगत से गड़बड़ी नहीं हो सकती है।
अधीक्षण अभियंता, पावर कॉर्पोरेशन पंकज कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि एक मशीन को जब्त करके कर्मचारी को हटा दिया गया है। मामले की जांच के लिए दो सदस्यीय टीम बना दी गई है। इसमें अधिशासी अभियंता टेस्ट घनश्याम और सहायक अभियंता आईटी को शामिल किया गया है।
टीम से जांच कर तीन दिन में रिपोर्ट देने को कहा गया है। यदि मशीन में गड़बड़ी पाई जाती है तो और मशीनों की भी जांच कराई जाती है। इसमें कंपनी के अधिकारी-कर्मचारी के अलावा यदि पावर कॉर्पोरेशन के अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता पाई जाती है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।