बस की एक भी सीट सही नहीं
बछरावां के एक निजी स्कूल के बाहर खड़ी खटारा बस अंदर से लेकर बाहर तक कबाड़ दिखी। बस की कोई भी सीट ऐसी नहीं दिखी, जिसे अच्छा कहा जा सके। इसी सीट पर छोटे-छोटे बच्चों को बैठाकर स्कूल लाया जा रहा है। स्कूल संचालक अभिभावकों से पूरा किराया और फीस वसूल रहा है, लेकिन सुविधाएं का सच बस की सीटें खुद बयां कर रही हैं।
अग्निशमन यंत्र से नहीं निकली गैस
परिवहन विभाग के अधिकारियों ने सलोन के एक स्कूल की बस में लगे अग्निशमन यंत्रों को चेक किया तो वह खराब मिला। अग्निशमन यंत्र से गैस ही नहीं निकली। फर्स्ट एड बॉक्स, सीसीटीवी कैमरे, स्पीड गवर्नर तक बसों में लगे नहीं मिले। स्कूली वाहन अन्य मानकों पर भी पूरी तरह से खरे नहीं पाए गए।
संवाद न्यूज एजेंसी
रायबरेली। जिले के निजी स्कूलों में संचालित वाहनों की फिटनेस में बरती जा रही मनमानी के ये नमूने मात्र हैं। जिले में 300 से अधिक खटारा वाहनों से बच्चों को लाया जा रहा है। ऐसे वाहनों से बच्चों की सुरक्षा को खतरा बना हुआ है, लेकिन स्कूल संचालकों के साथ ही विभाग के अधिकारी भी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं।
कई बसों की सीटें तो पूरी तरह से सड़ चुकी हैं। सीटें और शीशे टूटे हैं। चोट लगने पर बच्चों को प्राथमिक उपचार की सुविधा देने के लिए फर्स्ट एड बॉक्स तक कई बसों में उपलब्ध नहीं हैं। वाहनों में लगे अग्निशमन यंत्र दम तोड़ रहे हैं तो 80 फीसदी गाड़ियों में जीपीएस और सीसीटीवी कैमरे तक नहीं लगाए गए हैं।
स्पीड गवर्नर तक बसों में नहीं लगे हैं। ऐसे में सड़कों पर ओवर स्पीड में इन वाहनों को फर्राटा भरते देखा जा सकता है। आए दिन हादसों के बाद भी स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं आ रहे हैं। परिवहन विभाग की ओर से कडे़ निर्देश भी दिए गए, लेकिन किसी पर इसका असर नहीं दिख रहा है। एक ओर जहां स्कूल संचालक बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेपरवाह हैं, वहीं अभिभावक भी इससे अनजान बने हुए हैं।
सभी स्कूलों के संचालकों को वाहनों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। मानकाें को पूरा न करने वाले वाहनों को संचालित नहीं होने दिया जाएगा। 15 अप्रैल तक स्कूल संचालकों को एप पर स्कूली वाहनों की रिपोर्ट अपलोड करने के निर्देश दिए गए हैं।
-उमेश कटियार, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी प्रवर्तन रायबरेली