जिला अस्पताल में बुधवार को एक रोगी को बाहरी दवाएं लिखने पर तीमारदार भड़क गए। तीमारदारों ने इमरजेंसी में जमकर हंगामा किया। यही नहीं मामले की शिकायत स्वास्थ्य विभाग के टोल फ्री नंबर पर कर दी।
पोल खुलने के बाद फार्मासिस्ट ने मेडिकल स्टोर से खरीदकर लाई गई दवाएं गायब कर दीं और मामले को मैनेज करने में जुट गया। मुख्य चिकित्साधीक्षक ने मामले में जांच बैठा दी है। सीएमएस का कहना है कि आरोप सही मिलने पर दोषी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सतांव ब्लॉक क्षेत्र के आशानंदपुर निवासी सूरजदीन (75) को कई दिन से पेट और सीने में दर्द था। बुधवार को उसकी हालत बिगड़ गई। इस पर सूरजदीन का भाई राम आसरे, गांव के ही मिथिलेश कुमार व अन्य परिवारीजनों के साथ उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचा।
रोगी के भाई ने बताया कि इमरजेंसी में तैनात एक फार्मासिस्ट ने बाहर की दवाओं की पर्ची परिवारीजनों को पकड़ा दी। परिवारीजन करीब 500 रुपये की दवा मेडिकल स्टोर से खरीद लाए। इसका पता चला तो साथ आए मिथिलेश कुमार ने बाहर से दवा लिखने पर विरोध जताया।
इसे लेकर उससे व फार्मासिस्ट के बीच जमकर कहासुनी शुरू हो गई। मिथिलेश के साथ परिवारीजन भी फार्मासिस्ट का विरोध करने लगे। बात बढ़ने पर परिवारीजनों ने इसकी शिकायत इमरजेंसी की दीवार पर लिखे टोल फ्री नंबर पर कर दी।
उच्चाधिकारियों से शिकायत होने पर फार्मासिस्ट ने बाहर से मंगाई गई दवाएं गायब कर दी और मामले को रफादफा करने में जुट गया। सूचना मिलने पर सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव मौके पर पहुंचे और तीमारदारों व स्वास्थ्य कर्मियों से पूछताछ की। इमरजेंसी में हंगामे की घटना से अन्य रोगियों और तीमारदारों में अफरातफरी का माहौल रहा।