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Raebareli News: बारिश से भीगी धान की फसल, कटाई-मड़ाई बंद

Tue, 28 Oct 2025 12:56 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, रायबरेली
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बारिश के बाद धान की फसल को फैलाता किसान।
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रायबरेली। जिले का मौसम बदलने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर पड़ गई हैं। हल्की बारिश से खेतों में धान की मड़ाई और कटाई का काम बंद कर दिया गया है। किसानों को तेज बारिश होने पर भारी नुकसान की आशंका सता रही है। मौसम बदलने से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है।
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बूंदाबांदी के साथ बदली छाने से अक्तूबर में गर्मी का सिलसिला थम गया है। मौसम विभाग के मुताबिक आसपास के जिलों में बारिश से मौसम बदला है और आने वाले दिनों में धीरे-धीरे तापमान में गिरावट दर्ज होगी। सोमवार को सुबह से बदली छाई रही और बीच-बीच में बूंदाबांदी का सिलसिला जारी रहा। जिले के कुछ हिस्सों में हल्की बारिश भी हुई। सुबह से आसमान में बदली छाने के साथ धुंध रही। इससे वाहन चालकों को हेडलाइट ऑन कर आवागमन करना पड़ा।

हवा की रफ्तार बहुत धीमी रही। इस कारण सर्दी का असर बहुत अधिक नहीं रहा। लोगों को बदले मौसम से गर्मी से राहत मिली। बादलों को देखकर किसान परेशान रहे। खेतों में इस समय धान की कटाई और मड़ाई का काम चल रहा है। हल्की बारिश से किसानों ने धान की कटाई और मड़ाई का काम रोक दिया है। साथ ही अनाज को बारिश से भींगने से बचाने के लिए सुरक्षा का इंतजाम करना पड़ा।
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सोमवार को अधिकतम तापमान 32.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 21.8 डिग्री रहा। न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.8 डिग्री अधिक रहा। इंदिरा गांधी उड़ान अकादमी फुरसतगंज के मौसम विशेषज्ञ दीतेंद्र सिंह ने बताया कि न्यूनतम तापमान सामान्य से अधिक है और इस कारण मौसम में असंतुलन कायम है। आसपास के जिलों में बारिश हुई है, जिससे मौसम में बदलाव की संभावना है।


बादल छाने से किसान चिंतित
हलोर। सोमवार सुबह से ही आसमान में बादल छाने के कारण किसानों की धड़कनें तेज हो गईं। किसानों का कहना है कि अगर तेज बारिश हुई तो खेतों में तैयार पकी धान की फसल चौपट हो जाएगी। क्षेत्र के हलोर पुरासी अलीपुर जमुरावां कोटवा मोहम्मदाबाद मझिगवां हिलहा सहित पूरे क्षेत्र के किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें नजर आ रही हैं।

क्षेत्रीय किसान रामसागर चौधरी, संत कुमार चौधरी, गंगासागर पांडेय, उमाकांत पांडेय, मनोज मिश्रा, अंशुमान सिंह, लाल सिंह, भानू सिंह, दिलीप तिवारी, बबलू मिश्रा, सतीश शुक्ला, बाबूलाल का कहना है कि मौसम में उतार-चढ़ाव के कारण पहले से ही पैदावार काफी घट गई है। दूसरी तरफ अगर बारिश हुई तो खेतों में पड़ी किसानों की फसल चौपट हो जाएगी।
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