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Raebareli: निलंबन के तनाव ने छीना परिवार का सहारा, दो बेटियों के सिर से उठा पिता का साया

Sun, 30 Aug 2026 07:39 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya अमर उजाला नेटवर्क, गदागंज (रायबरेली)

सार

परिवार का आरोप है कि करीब एक वर्ष से निलंबन के चलते वेतन नहीं मिलने और आर्थिक परेशानियों के कारण वह लगातार मानसिक तनाव में रहते थे। शुक्रवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें उपचार के लिए ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान उनकी मौत हो गई।
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मृतक ओम प्रकाश मौर्य व विलाप करते परिजन। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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रायबरेली के गदागंज थाना क्षेत्र के रूप का पुरवा मजरे प्रयागपुर निवासी 46 वर्षीय ओम प्रकाश मौर्य की शुक्रवार को अचानक हार्ट अटैक से मौत हो गई। वह उत्तर प्रदेश उपभोक्ता सहकारी संघ लिमिटेड (UPSS) के बदायूं स्थित कार्यालय में स्टोर कीपर के पद पर तैनात थे। विभाग की ओर से उन्हें जिला प्रभारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई थी। परिजनों के मुताबिक, विभागीय कार्रवाई के चलते ओम प्रकाश को 11 सितंबर 2025 को निलंबित कर दिया गया था।

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परिवार का आरोप है कि करीब एक वर्ष से निलंबन के चलते वेतन नहीं मिलने और आर्थिक परेशानियों के कारण वह लगातार मानसिक तनाव में रहते थे। परिवार में दो बेटियों की पढ़ाई, बुजुर्ग माता-पिता के भरण-पोषण और घरेलू खर्च की जिम्मेदारी को लेकर वह काफी चिंतित रहते थे।

बताया गया कि शुक्रवार को अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें उपचार के लिए ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन इसी दौरान उनकी मौत हो गई। हार्ट अटैक से मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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मृतक की पत्नी ने विभागीय कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए हैं उनका कहना है कि उनके पति को गलत तरीके से फंसाकर निलंबित किया गया उनका कहना है कि आर्थिक तंगी और नौकरी को लेकर चल रहे तनाव ने ओम प्रकाश को मानसिक रूप से परेशान कर दिया था हालांकि, विभागीय आरोपों और जीवन निर्वाह भत्ते से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।

मामले में विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी ओम प्रकाश मौर्य अपने पीछे पत्नी, सरोज कुमारी व 16 वर्षीय बेटी मोनिका, 13 वर्षीय बेटी श्रेया और बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ गए हैं। परिवार के सामने अब बेटियों की पढ़ाई, भविष्य और बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। ओम प्रकाश की मौत के बाद एक परिवार का वह सहारा छिन गया, जिस पर पूरे घर की उम्मीदें टिकी थीं।

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