राज्य सड़क परिवहन निगम के अव्यवस्थाओं से जूझ रहे रायबरेली डिपो में पीने के पानी का भी संकट है। सांसद निधि से लगे आरओ की टोटियां चोर खोल ले गए।
वहीं एक वाटर कूलर भी बंद पड़ा है। इसका दंश यहां आने वाले आठ हजार लोगों को भुगतना पड़ रहा है। मुसाफिर को प्यास बुझाने के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है। बावजूद इसके अफसर गंभीर नहीं है।
रायबरेली डिपो की बसों से प्रतिदिन करीब 20 हजार मुसाफिर सफर करते हैं। बस स्टेशन परिसर में यात्रियों को शुद्ध पीने का पानी देने के लिए सांसद सोनिया गांधी की निधि से एक आरओ प्लांट की स्थापना कराई गई थी।
दो महीने पहले चोर आरओ की टोटियां चोरी कर ले गए। यहां पहले से वाटर कूलर लगा था, लेकिन पाइप लाइन में लीकेज के कारण उसे भी कई दिन पहले बंद कर दिया गया।
वर्तमान समय में स्टेशन परिसर में पेयजल की कोई व्यवस्था नहीं है। इससे लोगों को परेशानी हो रही है। स्टेशन परिसर में पेयजल की बदइंतजामी से जहां यात्री बेहाल हैं।
वहीं पानी बेचने वाले दुकानदारों की मजे ही मजे हैं। इलाके के दुकानदार यात्रियों की मजबूरी का फायदा उठाने से नहीं चूक रहे हैं। 18-20 रुपये की पानी की बोतल 22-25 रुपये में बेची जा रही है।
यही नहीं शुद्ध पानी के नाम पर हैंडपंपों का पानी पॉलीथिन में भर कर बेचा जा रहा है। इससे लोगों का स्वास्थ्य भी खतरे में है।
अमर उजाला से बातचीत में मुसाफिर अरविंद कुमार, विवेक कुमार, गौरव यादव, रमेश कुमार रावत समेत इलाके के लोगों ने बस स्टेशन में पेयजल की अव्यवस्था पर नाराजगी जताई।
कहा कि यात्रियों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं और बच्चों को हो रही है। लेकिन न तो नगर पालिका के अफसर ध्यान दे रहे हैं और न ही रोडवेज के अधिकारी।
रायबरेली डिपो के स्टेशन अधीक्षक अशोक त्रिपाठी ने बताया कि नगर पालिका परिषद को सूचना दी गई थी, लेकिन आरओ प्लांट हैंडओवर न होने की बात कहकर पालिका ने प्लांट सही कराने से मना कर दिया।
पालिका के अधिकारियों ने वाटर कूलर की पाइप लाइन के लीकेज जल्द ठीक कराने की बात कही थी, लेकिन अब तक काम नहीं हुआ।