रायबरेली। शासन की मंशा पर गांवों में पंचायत ऑपरेटरों की भर्ती की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जनसेवा संचालकों (वीएलई) का गुस्सा भड़क गया। गुरुवार को कलेक्ट्रेट पहुंचकर जमकर प्रदर्शन करते हुए भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किए जाने की मांग की।
आरोप लगाया कि गांवों में खोले गए जन सेवा केंद्रों पर वे ग्रामीणों की सरकार की योजनाओं का लाभ दिला रहे हैं। वीएलई को मानदेय भी दिए जाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन लगातार उपेक्षा की जा रही है।
प्रदर्शन करते हुए वीएलई दिनेश सिंह, रंजीत निर्मल, कर्मवीर सिंह, वीरेद्र यादव, प्रमोद मौर्या, मनोज शुक्ला आदि ने कहा कि कोरोना काल में जान जोखिम में डालकर घर-घर जाकर आर्थिक गणना के साथ ही डिजिटल साक्षरता, किसान सम्मान निधि, सुमंगला योजना, पेंशन सेवाएं सहित अन्य कार्य किए गए। आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डन कार्ड भी बनाए गए।
लगातार वीएलई काम कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हे उपेक्षा ही मिल रही है। आरोप लगाया कि बिना कंप्यूटर के ज्ञान वाले लोगों को पंचायत डाटा इंट्री ऑपरेटर के रूप में चयनित करने का प्रयास किया जा रहा है। जिसे कंप्यूटर के बारे में जानकारी नहीं है, वह क्या काम करेगा।
जन सेवा केंद्र के संचालकों ने भर्ती प्रक्रिया को बंद किए जाने की मांग की है। मांगों को पूरा न किए जाने पर धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी। इस मौके पर नीरज मौर्या, गणेश प्रताप सिंह, शशिकांत, राम लखन, राम प्रताप, आशीष, अभिषेक आदि मौजूद रहे।