हड़ताल के पहले ही दिन जहां प्रशासनिक काम-काज ठप हो गया। वहीं विकास भवन और कलेक्ट्रेट में काम न होने से फरियादियों को निराश लौटना पड़ा।
जिला अस्पताल के कर्मचारी हड़ताल पर रहे, लेकिन आपातकालीन सेवाएं इससे अलग रही। हड़ताल से आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि 80 फीसदी हड़ताल सफल रही।
विकास भवन में कई दफ्तरों में मंगलवार को सन्नाटा पसरा रहा। डीआईओस दफ्तर, लोक निर्माण विभाग, बीएसए दफ्तर, कलेक्ट्रेट व सिंचाई विभाग में भी यही हाल रहा।
जिला अस्पताल में कर्मचारियों ने हड़ताल की, लेकिन आपातकालीन सेवाएं हड़ताल से अलग होने के कारण रोगियों के इलाज में कोई असर नहीं पड़ा।
धरने को संबोधित करते हुए राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष प्रमोद अवस्थी ने कहा कि पुरानी पेंशन को बहाल किया जाए।
सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के माध्यम से कर्मचारियों को परेशान करने का काम किया गया है। इसे भी वापस लिया जाए।
ऐसा न करने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा। कमलेश नारायण तिवारी ने कहा कि सरकार की मनमानी का खामियाजा राज्य कर्मचारियों को भोगना पड़ रहा है।
कर्मचारी अपने हक के लिए पीछे नहीं हटेंगे। कर्मचारी बीएन यादव, रणवीर सिंह, बीएस सक्सेना व रवींद्र श्रीवास्तव आदि ने कहा कि जब तक मांगों को पूरा नहीं किया जाएगा, तब तक आंदोलन को जारी रखा जाएगा।
धरने में राघवेंद्र सिंह, डीपी सिंह, शेषदत्त दुबे, राजेंद्र कुमार, सुरेश सिंह आदि मौजूद रहे। कई दफ्तरों में कर्मचारी कामकाज करते नजर आए।
कर्मचारी नेताओं ने इन काम कर रहे कर्मचारियों को मनाया तो वे धरना स्थल पर पहुंचे, लेकिन पलक झपकते ही फिर ऑफिस दफ्तर पहुंचकर काम में जुट गए।
राज्य कर्मचारी महासंघ के जिलाध्यक्ष अनूप मिश्रा, महामंत्री पवनेंद्र श्रीवास्तव, मिनिस्ट्रीयिल फेडरेशन के जिलाध्यक्ष रामेंद्र सिंह व उपाध्यक्ष सर्वेश राय का कहना है कि राज्य कर्मचारी महासंघ का इस हड़ताल से कोई लेना देना नहीं है।
वहीं अमेठी जिले के सिंहपुर ब्लॉक कार्यालय में मंगलवार को कर्मचारी कलमबंद हड़ताल पर रहे। कर्मचारियों ने कामकाज नहीं किया और प्रदर्शन करके मांगों को पूरा कराने की मांग की।
मांगे पूरी न किए जाने तक आंदोलन को जारी रखने का निर्णय लिया। इस मौके पर संजय कुमार आनंद, करुणा शंकर, रविशंकर, रीता आदि मौजूद रहे।