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ओला पीड़ित दो लाख किसानों को खुली राहत की राह

Fri, 12 Feb 2016 11:37 PM IST
रायबरेली/अमर उजाला ब्यूरो
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प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शुक्रवार को सालाना बजट घोषित किया। हालांकि जिले को अलग से कुछ नहीं मिला, लेकिन प्रदेश के लिए तय बजट में अशासकीय शिक्षकों, किसानों व गरीबों को तोहफा जरूर मिला है। इससे जिले के लाखों लोगों को लाभ मिलेगा। किसानों को मुआवजा मिलेगा तो सूखाग्रस्त होने का भी फायदा मिलेगा।
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वित्तविहीन स्कूलों के 1200 से अधिक शिक्षकों को मानदेय के लिए बजट मिल गया है तो सड़कों व पुलों के लिए भी जिले को बजट मिलने की पूरी उम्मीद है। समाजवादी व वृद्धावस्था पेंशन का दायरा बढ़ने के बाद और गरीबों को योजना का लाभ मिल सकेगा।


1200 अशासकीय शिक्षकों को मिला तोहफा
वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को प्रदेश सरकार ने मानदेय देने के लिए बजट में व्यवस्था कर दी है। जिले में इसका लाभ करीब 1200 अशासकीय शिक्षकों को मिलेगा। ये शिक्षक मानदेय के लिए कई वर्षों से प्रयासरत थे। अब इन शिक्षकों की मेहनत रंग लाई है। इससे शिक्षकों में खुशी है।
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जिले के 185 वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों को प्रदेश सरकार ने सरकार बनते ही मानदेय देने की घोषणा की थी। लगातार प्रयास करने के बाद भी अब तक शिक्षकों को मानदेय नहीं मिल सका। इसके लिए वित्तविहीन माध्यमिक शिक्षकों ने धरना प्रदर्शन तक किया।

बार-बार ज्ञापन देकर प्रदेश सरकार से मानदेय की मांग की। प्रदेश सरकार की घोषणा के बाद से ही वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षक प्रयास में थे, कि उन्हें मानदेय मिले। उन्हें उम्मीद भी थी कि प्रदेश सरकार अपने वादे को पूरा करेगी।

शुक्रवार को प्रदेश सरकार ने सालाना बजट पेश किया। बजट में अशासकीय शिक्षकों को मानदेय देने के लिए बजट की व्यवस्था कर दी है। जिले के करीब 1200 शिक्षकों को मानदेय मिलने का रास्ता साफ हो गया है। जल्द ही शिक्षकों को मानदेय मिलेगा।

मानदेय के लिए बजट की व्यवस्था होने के बाद माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षकों में खुशी की लहर दौड़ गई। माध्यमिक शिक्षक वित्तविहीन शिक्षक महासभा के जिला महासचिव विजय मिश्रा ने बताया कि शिक्षकों की मेहनत रंग लाई है। प्रदेश सरकार ने अपने वादे को पूरा किया है।


दो लाख किसानों को मिलेगा मुआवजा
रायबरेली। ओलावृष्टि से प्रभावित जिले के किसानों में मुआवजे के लिए एक अरब 90 करोड़ रुपये की डिमांड की गई थी। प्रदेश सरकार की ओर से करीब 60 करोड़ रुपये ही अब तक मिले हैं। ऐसी स्थिति में शत प्रतिशत किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है। करीब दो लाख किसानों को मुआवजे का इंतजार है।

शुक्रवार को प्रदेश सरकार ने सालाना बजट में सूखाग्रस्त जिलों के लिए 2057 करोड़ रुपये और ओलावृष्टि से प्रभावित जिलों के किसानों के लिए 4498 करोड़ की व्यवस्था की है।

इसमें जिले का हिस्सा मिलने के बाद किसानों को मुआवजे की धनराशि मिल जाएगी। इससे किसानों में खुशी है। एडीएम वित्त एवं राजस्व शीतला प्रसाद ने बताया कि मुआवजे के लिए जो भी बजट आया, उसे तहसीलों को वितरण के लिए भेजा गया है। आगे भी जो बजट आएगा भेजा जाएगा।


दोनों पेंशन योजनाओं का लक्ष्य बढ़ाया गया
रायबरेली। जिले को समाजवादी पेंशन के लिए 56 हजार का लक्ष्य दिया गया था। लक्ष्य के सापेक्ष 56 हजार लाभार्थियों को समाजवादी पेंशन दी जा रही है। प्रदेश सरकार ने शुक्रवार को समाजवादी पेंशन का लक्ष्य बढ़ा दिया है। इससे अब यह संख्या और बढ़ जाएगी। इसके अलावा वृद्धावस्था पेंशन का लाभ भी 79 हजार गरीबों को मिल रहा था।

लक्ष्य बढ़ने के बाद अब और लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलेगा। जिला समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह ने बताया कि जिले में कोई भी आवेदन लंबित नहीं है। नया लक्ष्य आते ही आवेदन लेकर लाभार्थियों का चयन करके पेंशन योजना का लाभ दिया जाएगा।

छोटे पुलों व पर्यटन स्थलों के सड़क के लिए बजट
रायबरेली। प्रदेश सरकार ने छोटे पुलों के निर्माण के लिए बजट की व्यवस्था की है। हालांकि जिले में दो पुलों का निर्माण गुल्लूपुर व चौहनियां में हो रहा है। जिले में 50 से अधिक पुलों के मरम्मत की जरूरत है। यदि बजट मिल गया तो पुराने पुलों की दशा सुधर जाएगी।

प्रदेश सरकार ने प्रदेश में पुलों के निर्माण के लिए 1180 करोड़ रुपये का इंतजाम किया है। जिले को लखनऊ से फोरलेन से जोड़ा जा चुका है। अब जिले केा इलाहाबाद से फोर लेन से जोड़ने की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि इस कार्य में अभी समय लगेगा। जिला मुख्यालयों को फोर लेन से जोड़ने के लिए प्रदेश के लिए 1100 करोड़ रुपयों की व्यवस्था की गई है।

जिले के छोटे-बडे़ सभी पर्यटन स्थलों के लिए सड़क बनी हैं, लेकिन उनके मरम्मत की जरूरत है। मरम्मत के लिए बजट मिल गया तो सड़कों की दशा सुधर जाएगी। लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के एक्सईएन अरविंद कुमार का कहना है कि दो पुलों का निर्माण हो रहा है।


किसानों को गन्ने का एक करोड़ बकाया मिलेगा
रायबरेली। शासन द्वारा पिछले साल तक गन्ना के सभी किसानों को शत प्रतिशत भुगतान किया गया, लेकिन इस साल करीब एक करोड़ रुपये बकाया है।

इसमें शासन द्वारा तय 230 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से किसानों को भुगतान दिया जा चुका है। इसके अलावा 50 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान चीनी मिलों के बंद होने के तीन महीने बाद देने की व्यवस्था है। यह धनराशि करीब एक करोड़ रुपये है। जिला गन्ना अधिकारी रत्नेश्वर त्रिपाठी ने बताया कि पिछले साल का पूरा भुगतान हो चुका है।

इस साल 230 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना किसानों को भुगतान दिया जा चुका है। चीनी मिल बंद होने के तीन महीने बाद मिलने वाली धनराशि का करीब एक करोड़ रुपये बकाया है। चूंकि शासनादेश है, इसलिए यह धनराशि चीनी मिलों के बंद होने के बाद भी मिलती है।
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