रायबरेली। नगर पालिका और नगर पंचायत क्षेत्रों के पथ विक्रेताओं को प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि योजना का लाभ देने में बैंकों की मनमानी और सुस्ती का खामियाजा पथ विक्रेता भुगत रहे हैं। 31 मार्च तक 2274 को ऋण देने के लक्ष्य के सापेक्ष बैंकों ने महज 358 स्ट्रीट वेंडरों को ही कर्ज दिया है। सीडीओ की चेतावनी के बाद भी बैंकों की ओर से महत 15 फीसदी ही लक्ष्य की प्राप्ति की गई है।
डूडा की जिला शहरी मिशन प्रबंधक नेहा श्रीवास्तव ने बताया कि योजना के तहत शुरू में पथ विक्रेताओं को अपना रोजगार स्थापित करने के लिए 10-10 हजार रुपये का कर्ज डूडा के माध्यम से दिलाने की व्यवस्था की गई थी। अब शासन स्ट्रीट वेंडरों को 20-20 हजार रुपये का ऋण मुहैया करा रहा है। जिले की एक नगर पालिका और आठ नगर पंचायतों में आगामी 31 मार्च तक 2274 स्ट्रीट वेंडरों को लाभान्वित कराने के लक्ष्य दिए गए थे।
लक्ष्य के सापेक्ष बैंकों ने मनमानी की सारी हदें पार कर दी हैं। बीती 31 मार्च तक 2274 स्ट्रीट वेंडरों को 20-20 हजार रुपये का ऋण देने का लक्ष्य रखा गया। लक्ष्य के सापेक्ष अब तक मात्र 358 स्ट्रीट वेंडरों को ही योजना का लाभ दिया गया है। पिछले महीने सीडीओ प्रभाष सिंह ने लीड बैंक प्रबंधक, नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों और बैंकों के जिला समन्वयकों को पत्र जारी करके खराब प्रगति पर नाराजगी जताते हुए 31 मार्च तक शत प्रतिशत प्रगति लाने के आदेश दिए थे, लेकिन बैंक के अधिकारियों पर सीडीओ की चेतावनी का कोई असर नहीं पड़ा।
परियोजना अधिकारी डूडा मुनेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि योजना के तहत पथ विक्रेताओं को कर्ज दिलाने के लिए बैंकों को पत्रावलियां भेजी जाती हैं। 2274 स्ट्रीट वेंडरों को लाभ देने के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक बैंकों ने मात्र 358 को ही ऋण का लाभ दिया है। सीडीओ के स्तर से बैंकों को निर्देशित किया गया है।