डलमऊ (रायबरेली)। डलमऊ कस्बेे में गुरुवार को भारत तिब्बत सीमा सुरक्षा बल (आईटीबीपी) में भवन निर्माण कार्य के दौरान हाइड्रोलिक रॉड टूटने से मिक्सर मशीन काम कर रहे तीन श्रमिकों पर गिर गई। इसमें एक श्रमिक की मौत हो गई, जबकि दो घायल हो गए। घटना से परिसर में हड़कंप मच गया।
एक घायल की हालत गंभीर होने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। सूचना पर पुलिस ने पहुंचकर शव को कब्जे में लेते हुए घटना की पड़ताल की। मृत श्रमिक की एक माह पहले ही शादी हुई थी। उसकी मौत से परिवारीजनों में कोहराम मच गया।
डलमऊ कस्बा स्थित आईटीबीपी परिसर में डी कृष्णा कंस्ट्रक्शन भवन निर्माण का कार्य रही है। झांसी जिले के एरच थाना क्षेत्र के हरदूवा गांव निवासी बृजकिशोर (28) पुत्र ऊपचंद्र, मोनोरी उर्फ मनोहर (30) पुत्र जयराम अन्य साथियों के साथ भवन निर्माण का कार्य कर रहे थे।
इसी दौरान मिक्सर मशीन का हाइड्रोलिक रॉड टूट गया। इससे मिक्सर मशीन काम कर रहे तीन श्रमिकों पर जा गिरी। इससे सभी मशीन के नीच दब गए। घटना के बाद चीख-पुकार मच गई। आईटीबीपी के जवानों ने तीन श्रमिकों को बाहर निकाला।
इसमें बृजकिशोर और उसके साथी मोनोरी को सीएचसी पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने बृजकिशोर को मृत घोषित कर दिया। वहीं मोनोरी को जिला अस्पताल रेफर किया गया। एक अन्य श्रमिक घायल हुआ, लेकिन उसे सीएचसी नहीं लाया गया।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस डलमऊ सीएचसी पहुंचकर मृतक युवक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मृतक की पत्नी प्रियंका और मां लक्ष्मी के आंसू नहीं थम रहे हैं। मां ने बताया कि एक माह पहले ही बेटे की शादी हुई थी। कोतवाल श्रीराम का कहना है कि तहरीर के आधार पर मामले में कार्रवाई होगी।
जर्जर न होती मशीन तो बच सकती थी जान
डलमऊ के आईटीबीपी कैंप में भवन निर्माण का कार्य करीब चार वर्षों से हो रहा था। यह काम एक कार्यदायी संस्था को मिला था। संस्था के अधिकारियों द्वारा कांस्ट्रक्शन के ठेकेदारों को भी काम दिया गया है। जिन श्रमिकों से कैंप के अंदर कार्य करवाया जा रहा था, उनके पास सुरक्षा व्यवस्था के लिए कोई इंतजाम एवं सामग्री आदि नहीं थी, जिससे वह स्वयं को दुर्घटना से बचा सकें।
गुरुवार को ऐसा ही एक दर्दनाक हादसा आईटीबीपी कैंप के अंदर देखने को मिला। कैंप के अंदर भवन निर्माण का कार्य हो रहा था। श्रमिक मिक्सर मशीन के नीचे खड़े हुए थे। यहां तक कि जिस मिक्सर मशीन से कार्य करवाया जा रहा था, वह भी बहुत पुरानी और जर्जर अवस्था में थी।
इसके बावजूद ठेकेदारों द्वारा कार्य कराया जा रहा था। भवन निर्माण के दौरान मिक्सर मशीन में लगा हाइड्रोलिक का तार टूटने से वह श्रमिकों के ऊपर गिर गया। पीड़ित परिवार का कहना है कि मामले में ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
कैंप में नहीं सेफ्टी इंजीनियर की तैनाती
कैंप के अंदर सेफ्टी इंजीनियर की तैनाती नहीं की गई है। विभागीय सूत्रों की मानें तो सेफ्टी इंजीनियर द्वारा जर्जर उपकरण सहित विभिन्न प्रकार के कार्यों की देखरेख करते हैं। यहां तक कि बिना सेफ्टी व्यवस्था के श्रमिकों को काम पर नहीं रखा जाता।
अगर कैंप के अंदर सेफ्टी की व्यवस्था हुई होती तो आज एक श्रमिक की जान बच सकती थी। इस संबंध में जब आइटीबीपी के उच्चाधिकारियों से वार्ता की गई तो उन्होंने बात करने से मना कर दिया।
आइटीबीपी कैंप के अंदर आए दिन इस तरह की घटनाएं हुआ करती हैं, लेकिन यहां पर नियम कानून का बहाना बताकर लोगों का प्रवेश करना वर्जित कर देते हैं, जिससे कैंप के अंदर हो रहे कार्य प्रकाशित नहीं हो रहे हैं। उधर, एस डीएम सविता यादव ने बताया कि घटना मेरी जानकारी में नहीं है। मामले की जांच कराई जा रही है।