रायबरेली। जगतपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत शंकरपुर में मनरेगा से अधूरे खड़ंजा निर्माण को पूर्ण दिखाकर 92 हजार रुपये के गबन के मामले की जांच में पुष्टि होने के बाद प्रधान समेत अन्य छह दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
जांच रिपोर्ट आने के बाद डीसी मनरेगा ने प्रधान के अलावा तत्कालीन एपीओ, टीए, सचिव, लेखाकार व कंप्यूटर ऑपरेटर आदि को कारण बताओ नोटिस देकर जवाब मांगा है। सभी को सात दिन के अंदर जवाब देने के आदेश दिए गए हैं।
जगतपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत शंकरपुर में वर्ष 2017-18 में राममनोहर के घर से छेदीलाल के घर तक मनरेगा से खड़ंजा निर्माण का कार्य स्वीकृत किया गया। शिकायत के बाद हुई जांच में पाया गया कि 1845 ईंटें कम लगाई गईं। 10 मस्टररोल में केवल प्रधान शांति के हस्ताक्षर हैं। ग्राम रोजगार सेवक, सचिव के हस्ताक्षर मस्टररोल पर नहीं मिले लेकिन भुगतान कर दिया गया।
एमआईएस में ईंट के भुगतान का वाउचर फीड है। वाउचर संख्या 21 में 30 हजार ईंटों का 1,54,200 रुपये और वाउचर संख्या 53 में 25 हजार ईंटों का 1,28,500 रुपये का भुगतान किया गया है। दोनों बिलों से 55 हजार ईंटों का 2,82,700 रुपये का भुगतान किया गया है।
जांच में यह भी पाया गया कि कार्य में प्रयुक्त 37059 ईंटों का 1,90,483 रुपये का भुगतान किया जाना चाहिए था लेकिन 17941 ईंटों की धनराशि 92,217 रुपये का दुरुपयोग किया गया है।
जांच रिपोर्ट आते ही डीसी मनरेगा ने प्रधान शांति, तत्कालीन सचिव प्रमोद कुमार, तत्कालीन तकनीकी सहायक सुरेश बहादुर सिंह, तत्कालीन अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी राशिद उल मुज्तबा फारुकी, तत्कालीन सहायक लेखाकार गंगा प्रसाद और तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर मो. सलाउद्दीन को कारण बताओ नोटिस देकर सात दिन में जवाब देने के आदेश दिए हैं। जवाब न आने पर कार्रवाई की चेतावनी दी है।
उपायुक्त (मनरेगा) पवन कुमार सिंह ने बताया कि जगतपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत शंकरपुर में मनरेगा से खड़ंजा निर्माण की जांच में कम ईंटें लगाए जाने का मामला पकड़ में आया है। जांच रिपोर्ट आने के बाद प्रधान समेत संबंधित छह लोगों को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है। जवाब आने के बाद कार्रवाई होगी।