रायबरेली। शहर में मलिकमऊ के निकट क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज के दरकने का मामला अफसरों के गले की फांस बन गया है। एनएचएआई के अधिकारियों ने हैदराबाद की जीकेसी कंपनी के अफसरों को तलब किया है।
इसी कंपनी ने हाईवे के साथ ओवरब्रिज का निर्माण कार्य कराया था। दो साल में ही करीब 40 करोड़ से बना ओवरब्रिज दरक गया। सोमवार को टीम के सदस्यों के यहां पहुुंचने की संभावना जताई जा रही है।
एनएचएआई ने दो साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ओवरब्रिज का लोकार्पण कराया था। जिले से होकर निकले सुल्तानपुर वाया टांडा नेशनल हाईवे पर मलिकमऊ के निकट रेलवे क्रॉसिंग पर बने ओवरब्रिज के एक्सपेंशन ज्वाइंट में शनिवार को दरार आ गई थी।
इसकी जानकारी होने पर अफसरों में हड़कंप मच गया था। 636 करोड़ रुपये से बने हाईवे और ओवरब्रिज के निर्माण में धन की बंदरबांट का नतीजा रहा कि इतनी जल्दी ओवरब्रिज दरक गया।
एनएचएआई के परियोजना प्रबंधक समर सिंह का कहना है कि ओवरब्रिज का निर्माण कार्य हैदराबाद की जीकेसी कंपनी की तरफ से कराया गया था।
कंपनी के अधिकारियों को तलब किया गया है। इसी कंपनी की ओर से ओवरब्रिज के मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। उम्मीद है कि कंपनी के अधिकारियों की टीम सोमवार को यहां पहुंचकर मरम्मत का कार्य शुरू करा देगी।
दरकने के साथ रेलिंग भी टूटी
ओवरब्रिज के निर्माण में कमीशनबाजी का खेल इस कदर चला कि बीच जगह से दरकने के साथ ही ओवरब्रिज की रेलिंग भी कई जगह से क्षतिग्रस्त हो गई है। थोड़ा सा धक्का लगने पर रेलिंग के टूूटने का खतरा है।
रविवार को अमर उजाला की टीम मौके पर पहुंची तो कई जगह पर रेलिंग टूटी दिखी। यही नहीं ओवरब्रिज पर डामर डालने में भी कंजूसी बरत गई। कुछ ही माह बाद कई जगह पर गिट्टियां बाहर निकल आईं हैं। इससे लोगों को सफर करना भी मुश्किल हो रहा था।
24 घंटे बाद भी ओवरब्रिज की मरम्मत नहीं हुई शुरू
ओवरब्रिज दरक जाने के कारण आवागमन प्रभावित चल रहा है। रूट डायवर्जन करके वाहनों को गंतव्य की ओर भेजा जा रहा है, लेकिन मुश्किलें लोगों की कम नहीं हो रही हैं, क्योंकि दूरी बढ़ने से उन्हें गंतव्य तक पहुंचने में समय लग रहा है। ओवरब्रिज के दरक जाने को 24 घंटे से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन मरम्मत का काम शुरू नहीं हो सका है। विभागीय अधिकारी रविवार की छुट्टी में मस्त रहे।
यही वजह है कि कोई अधिकारी मौके तक नहीं पहुंचा। यह हाल तब है, जब अधिकारियों की ओर से शनिवार को दावा किया गया कि दस दिन के अंदर ओवरब्रिज की मरम्मत का काम शुरू करा दिया जाएगा।
जान जोखिम में डालकर रेल पटरी से गुजरते रहे लोग
ओवरब्रिज के ऊपर से लोगों के जाने पर रोक तो लगा दी गई है, लेकिन रविवार को पुल के नीचे हिस्से स्थित रेलवे क्रॉसिंग से लोग जान जोखिम में डालकर आते-जाते दिखे। जान जोखिम में डालकर आने जाने वाले लोगों को रोकने के लिए वहां पर कोई पुलिस कर्मी तक तैनात नहीं था। यह चूक लोगों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है, लेकिन यह पुलिस को नहीं दिख रहा है।