रायबरेली। मिलावटी दूध बेचने के मुकदमे की सुनवाई करते हुए प्रथम अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) अनिशा ने 15 साल बाद दूधिये को दोषी करार दिया है। आरोपी को छह माह के कारावास की सजा सुनाई है।
तत्कालीन खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने 18 जून 2007 को लालगंज क्षेत्र के चांदाटीकर निवासी राजेंद्र कुमार से लालगंज रोड बहाई में दूध का नमूना लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा था। जांच में दूध मिलावटी मिला था। दूध में मिल्क फैट और मिल्क सालिड नेट फैट की मात्रा काफी कम मिलने के साथ ही उसमें कार्बोनेट और न्यूट्रालाइजर भी मिला था। प्रक्रिया पूरी करने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने वर्ष 2010 में दूध विक्रेता के खिलाफ एसीजेएम कोर्ट में मुकदमा किया था।
15 साल बाद एसीजेएम ने दूध विक्रेता को दोषी करार दिया। उसे खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 को दोषी पाते हुए छह माह के साधारण कारावास की सजा सुनाई। आरोपी पर एक हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया। जुर्माने की राशि को जमा न करने पर 15 दिन की अतिरिक्त साधारण कारावास की सजा मिलेगी।
अभिहित अधिकारी डॉ. सीआर प्रजापति ने बताया कि एक मुकदमे में एसीजेएम ने दूध विक्रेता को सजा दी है। अन्य मुकदमों में बेहतर पैरवी करके खाद्य कारोबारियों को सजा दिलाने का प्रयास किया जा रहा है।