रायबरेली। कोरोना मरीजों के लिए संजीवनी बनी ऑक्सीजन का उत्पादन गंगागंज स्थित गजबदन इंड्रस्ट्रियल एंव मेडिकल गैसेज प्लांट में बढ़ गया है। मात्र 15 दिन में प्लांट से 25 हजार किलो ऑक्सीजन की आपूर्ति की गई है। एम्स के एल-3, रेलकोच के एल-2 और जिला अस्पताल को रोजाना 400 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर पहुंचाए जा रहे है। डीएम व अन्य अधिकारियों के प्रयास से सोमवार को भी पांच मीट्रिक टन लिक्विड और आ गया है।
जिले में करीब 15 दिनों से कोरोना संक्रमित मरीजों के लिए ऑक्सीजन की डिमांड तेजी से बढ़ गई है। जिले के इकलौते शहर से सटे गंगागंज स्थित गजबदन इंड्रस्ट्रियल एंव मेडिकल गैसेज प्लांट को ही कोविड अस्पतालों को ऑक्सीजन पहुंचाने की जिम्मेदारी है। यहां दिन रात ऑक्सीजन का उत्पादन कराया जा रहा है। वर्तमान समय में रोजाना 400 से अधिक ऑक्सीजन सिलेंडर भरकर एम्स, एल-2 और जिला अस्पताल पहुंचाए जा रहे हैं। जिससे कि कोरोना संक्रमित मरीजों में ऑक्सीजन की कमी न होने पाए।
प्लांट में एक बार में 19 हजार किलो ऑक्सीजन की क्षमता है। अप्रैल माह में लिक्विड मिलने में दिक्कत होने पर कई दिनों तक प्लांट को बंद रखना पड़ गया था। ऐसी स्थिति में अस्पतालों में ऑक्सीजन की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी, लेकिन डीएम वैभव श्रीवास्तव और प्लांट के संचालक सुमित चौबे के प्रयास से लिक्विड की आपूर्ति बहाल हो गई है। सोमवार को भी पांच मीट्रिक टन लिक्विड मिला है। ऐसे में ऑक्सीजन की आपूर्ति बरकरार है।
पिता के इलाज के साथ ऑक्सीजन दे रहे सुमित
गंगागंज स्थित गजबदन इंडस्ट्रियल एंव मेडिकल गैसेज प्लांट के संचालक सुमित चौबे के पिता कोरोना संक्रमित हो गए हैं। उन्हें होम आइसोलेट कराया गया है। पिता के इलाज के साथ ही सुमित दिन रात प्लांट पर पहुंचकर अस्पतालों को ऑक्सीजन की आपूर्ति करवा रहे हैं। सुमित का कहना है कि काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन हर मरीज की जान बचानी है, इसलिए प्रयास यही किया जा रहा है कि अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी न होने पाए। पिता की सेहत पर भी ध्यान देना पड़ रहा है। दोनों ही काम कर रहे हैं। अस्पतालों में ऑक्सीजन की कमी नहीं होने पाएगी।