रायबरेली। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने नो क्लेम के एक मुकदमे में सुनवाई करते हुए बीमा कंपनी को फटकार लगाई है। कंपनी ने बहाना करके क्लेम देने से इन्कार कर दिया था। मुकदमे के दौरान आयोग ने पाया कि ट्रेन का टिकट लेकर यात्रा करते समय बीमित व्यक्ति की मौत हो गई। ऐसी स्थिति में बीमा कंपनी उनकी पत्नी को 12 लाख रुपये के क्लेम का भुगतान करे। साफ कहा कि जब ट्रेन का टिकट लिया तो युवक आत्महत्या कैसे कर सकता है।
जिले के लालगंज निवासी राम सनेही ने वर्ष 2021 में भारतीय जीवन बीमा से तीन लाख की पॉलिसी ली थी। प्रीमियम के रूप में 4579 रुपये जमा किए थे। इसके बाद वादिनी के पति ने 4654 रुपये प्रीमियम जमा कर एक और तीन लाख का बीमा करवाया था। पाॅलिसी में पत्नी कमला को नॉमिनी बनाया था। बीमा अवधि में बीमित व्यक्ति की ट्रेन दुर्घटना में मौत होने के बाद पत्नी ने क्लेम देने का बीमा कंपनी से अनुरोध किया। बीमा कंपनी ने महिला को पांच हजार रुपये देकर क्लेम देने से इन्कार कर दिया।
बीमा कंपनी ने आत्महत्या की बात रखी। दोनों पक्षों की बात को सुनने के बाद आयोग के अध्यक्ष मदन लाल निगम, सदस्य प्रतिमा सिंह व सुनीता मिश्रा ने बीमा कंपनी को वादिनी को 12 लाख रुपये का क्लेम देने का आदेश दिया। आयोग ने माना कि बीमित व्यक्ति टिकट लेकर कानपुर जा रहा था। ट्रेन में चढ़ते समय पैर फिसल गया और ट्रेन के नीचे आने से उनकी मौत हो गई। उन्होंने आत्महत्या नहीं की।