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डॉक्टर बिना ढाई साल से अल्ट्रासाउंड जांच ठप, प्रसूताओं की जेब हो रही ढीली

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14-रायबरेली में महिला जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में लगा ताला।।संवाद - फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही महिलाओं और उनके तीमारदारों पर भारी पड़ रही है। गर्भावस्था के दौरान शिशु की देखभाल के लिए अल्ट्रासाउंड जांच अनिवार्य है। यह जांच सरकारी अस्पतालों में मुफ्त किया गया है, लेकिन जिला महिला अस्पताल में यह जांच पिछले करीब ढाई साल से बंद है। यहां पर सोनोलॉजिस्ट की व्यवस्था नहीं है। इस वजह से महिलाओं का आर्थिक शोषण हो रहा है। मजबूरी में गर्भवती महिलाओं को निजी पैथालॉजी से अल्ट्रासाउंड की जांच करवानी पड़ रही है।
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रोजाना ओपीडी में आने वाली 50 से अधिक गर्भवती महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच करवानी पड़ रही है, लेकिन अस्पताल में सुविधा न होने से निजी सेंटरों पर 800 से एक हजार रुपये खर्च करके जांच करवाना पड़ रहा है। महिला अस्पताल प्रशासन अब तक डॉक्टर की व्यवस्था कर पाने में नाकाम रहा है। जिला महिला अस्पताल के सोनोलॉजिस्ट डॉ. राजीव दीक्षित का जुलाई 2019 में तबादला हो गया था। जिला अस्पताल प्रशासन ने डॉक्टर को रोकने का प्रयास नहीं किया, जबकि महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जांच बहुत जरूरी है।
अधिकारियों की लापरवाही से लगातार ढाई साल से महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं की अल्ट्रासाउंड जांच बंद है। जिले की सीएचसी में आने वाले गर्भवती महिलाओं को भी यहां अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसका पूरा फायदा प्राइवेट अस्पताल उठा रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने शुरू में तो रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था के लिए प्रयास किया, लेकिन सुनवाई न होने के कारण अधिकारी भी चुप्पी साध गए हैं। स्थिति यह है कि महिला अस्पताल की ओपीडी में रोजाना ने 150 से 200 गर्भवती महिलाएं इलाज करवाने के लिए आ रही हैं। 50 से अधिक महिलाओं को अल्ट्रासाउंड जांच के लिए सलाह दी जा रही है, लेकिन सभी को प्राइवेट क्लीनिकों से यह जांच आठ सौ से एक हजार रुपये खर्च करके करवानी पड़ रही है।
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बाहर एक-एक हजार जमा करके कराया अल्ट्रासाउंड
जिला महिला अस्पताल में इलाज करवाने के लिए आईं लालगंज क्षेत्र की प्रतिमा और राही क्षेत्र की रहने वाली रेखा को बाजार में एक-एक हजार रुपये जमा करके अल्ट्रासाउंड जांच करवानी पड़ी। अस्पताल में जांच करवाने का प्रयास किया, लेकिन सेंटर में ताला लटकने के बाद उन्हें बाजार के चक्कर लगाने पड़े।
महिलाओं का आरोप है कि सरकार ने अस्पतालों में सभी जांचें मुफ्त कर दी हैं, लेकिन महिला अस्पताल में जांच करवाने के लिए भटकना पड़ रहा है। मजबूरन बाजार से जांच करवानी पड़ रही है। इसी तरह अन्य महिलाओं को बाजार से रुपये देकर जांच करवानी पड़ी। उनका कहना है कि गर्भावस्था में प्रसूताओं के गर्भ की स्थिति की जांच अल्ट्रासाउंड से हो सकती है। जांच के बाद अच्छे तरीके से गर्भ की देखभाल की जा सकती है और इलाज हो सकता है, लेकिन जांच की सुविधा बंद होने से प्रसूताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अल्ट्रासाउंड सेंटरों के संचालक प्रसूताओं से जांच के नाम पर मनमानी रकम वसूल रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की जांच के लिए सोनोलॉजिस्ट की व्यवस्था के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। इसके लिए कई बार पत्र लिखा गया है। जांच न हो वाले के कारण गर्भवती महिलाओं को परेशानी होती है। ओपीडी में भी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। सोनोलॉजिस्ट के आने पर ही जांच शुरू कराई जाएगी।
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- डॉ. रेनू चौधरी, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल
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