छह सीएचसी में आज तक सिजेरियन नहीं
जिले की जगतपुर, सरेनी, रोहनिया, नसीराबाद, डीह और दीनशाह गौरा सीएचसी में आज तक एक भी सिजेरियन प्रसव नहीं हुए। प्रसूताओं को हालत गंभीर होने पर तत्काल रेफर कर दिया जाता है। विभाग की ओर से न तो महिला डॉक्टर की व्यवस्था कराई जा रही है और न ही ऑपरेशन थिएटर में पर्याप्त बंदोबस्त कराए गए हैं। इससे महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
एफआरयू में सुविधा, फिर भी भटकतीं प्रसूताएं
सीएचसी बछरावां, ऊंचाहार, लालगंज, सलोन, डलमऊ को फर्स्ट रेफरल यूनिट बनाया गया है। इस सीएचसी में भी सिजेरियन प्रसव रामभरोसे हैं। कहीं महिला चिकित्सक तो कहीं बेहोशी के डॉक्टरों की कमी के कारण नियमित तरीके से सिजेरियन प्रसव नहीं हो पा रहे हैं। महराजगंज व डलमऊ में स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी है। इसका खमियाजा मरीज भुगत रहे। बछरावां, लालगंज, ऊंचाहार व सलोन के बेहोशी के डॉक्टर नहीं हैं।
रायबरेली। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में ऑपरेशन से प्रसव ठप हैं। जिले की छह सीएचसी में कई वर्षों में एक भी सिजेरियन नहीं कराए गए हैं। कहीं बेहोशी के डॉक्टर तो कहीं स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। इस साल अब तक एक भी ऑपरेशन सीएचसी स्तर पर नहीं किया गया। अस्पतालों में सिर्फ सामान्य प्रसव ही कराए गए। सीएचसी में आने वाली प्रसूताओं को नाजुक हालत होने पर जिला महिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। इससे प्रसूताओं की जान पर बन सकती है।
जिले की सभी 19 सीएचसी में ऑपरेशन थिएटर हैं। सीएचसी स्तर पर सामान्य प्रसव के साथ ही जरूरत पड़ने पर सिजेरियन कराने के आदेश हैं, लेकिन जिले में शासन की मंशा पर पानी फेरा जा रहा है। ऊंचाहार, बछरावां, लालगंज और सलोन को छोड़कर कहीं भी ऑपरेशन से प्रसव नहीं कराए जा रहे हैं। इन सीएचसी से भी ज्यादातर प्रसूताओं को महिला अस्पताल रेफर किया जा रहा है। सीएचसी स्तर पर बेहोशी के डॉक्टर न होने के कारण ऑपरेशन नहीं हो पा रहे हैं। 10 से अधिक सीएचसी में स्त्री रोग विशेषज्ञ ही नहीं हैं।
फर्स्ट रेफरल यूनिटों में ऑपरेशन से प्रसव कराने की सुविधा उपलब्ध है। डॉक्टर के साथ ही ऑपरेशन थिएटर भी दुरुस्त हैं। अन्य सीएचसी में पर्याप्त बंदोबस्त न होने के कारण ऑपरेशन प्रसव नहीं हो पा रहे हैं। इसके लिए व्यवस्था कराई जा रही है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ