रायबरेली में सोमवार को जिला अस्पताल की ओपीडी में चिकित्सक कक्ष के सामने लगी मरीज व तीमारदारों की
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रायबरेली। मनमानी कार्यशैली को लेकर सीएमएस को हटाए जाने के बाद सोमवार को जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी पर लौट आईं। सभी चिकित्सक ओपीडी कक्षों में मरीजों का इलाज करने के लिए सुबह से ही बैठे तो वार्डों में भी स्टाफ के चेहरे पर खुशी देखने को मिली। ओपीडी में मरीजों की संख्या भी अधिक देखने को मिली।
जिला अस्पताल में पूर्व में तैनात रहीं सीएमएस डॉ. नीता साहू ने शुरू में अस्पताल को सुधारने का प्रयास किया। मरीजों को बाजार से दवाएं लिखे जाने पर पाबंदी लगाने के साथ ही स्टाफ को भी समय से अस्पताल में पहुंचने का दबाव बनाया। शुरू में तो काम अच्छा किया, लेकिन बाद में उनका विरोध इतना बढ़ गया कि इसका खामियाजा मरीजों को भोगना पड़ा। ओपीडी से लेकर वार्डों तक डॉक्टरों व स्टाफ में नाराजगी होने के कारण मरीजों को परेशानी हुई। पद से हटाए जाने के बाद भी कुर्सी न छोड़ने पर बीती दो जुलाई को अपर निदेशक डॉ. जीएस बाजपेयी और सीएमओ डॉ. वीरेंद्र सिंह ने जिला अस्पताल पहुंचकर नए सीएमएस डॉ. महेंद्र मौर्या को जॉइन करवाया था।
सोमवार को सुबह से ही सभी चिकित्सक अपने ओपीडी कक्षों में मरीजों को परामर्श देने के लिए बैठे। प्रभारी सीएमएस का चार्ज मिलने के बाद भी डॉ. बीरबल ने ओपीडी की। इसके अलावा सर्जन डॉ. जेके लाल, डॉ. सलीम सहित अन्य डॉक्टरों ने भी ओपीडी की। वार्डों में भी मरीजों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। ओपीडी में सोमवार को 1300 से अधिक मरीज इलाज कराने के लिए पहुंचे।
पूर्व सीएमएस ने नहीं छोड़ा सरकारी आवास
पद से हटाए जाने और रिलीव किए जाने के बाद भी जिला अस्पताल की पूर्व सीएमएस ने सरकारी आवास को नहीं छोड़ा है। सोमवार को भी वह सीएमएस के सरकारी आवास में जमी रहीं। हालांकि अस्पताल नहीं आईं, लेकिन सरकारी आवास न छोड़ने को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
सामान्य तरीके से हुई ओपीडी
जिला अस्पताल में सोमवार को सामान्य तरीके से ओपीडी हुई। सभी चिकित्सक अपने ओपीडी कक्षों में मरीजों का इलाज करने के लिए बैठे। वार्डों में भी कोई अव्यवस्था नहीं होने पायी। मरीजों को बेहतर इलाज की सुविधा देने का प्रयास किया गया। -डॉ. बीरबल, प्रभारी सीएमएस जिला अस्पताल