रायबरेली। जिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. नीता साहू जनवरी माह में जॉइन करने के साथ ही चर्चा में आ गईं थीं। विधानसभा चुनाव की अधिसूचना लागू होने के बाद भी वह नौ जनवरी को नीली बत्ती, भाजपा का झंडा और खुद की फोटो के स्टीकर लगी गाड़ी से जॉइन करने जिला अस्पताल पहुंची थीं।
आचार संहिता उल्लंघन के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के बाद शासन ने विभागीय कार्रवाई के लिए निदेशक (प्रशासन) को जांच सौंपी है। मामले में जल्द ही सीएमएस पर गाज गिर सकती है।
जिला पुरुष चिकित्सालय के सीएमएस डॉ. एनके श्रीवास्तव का गैर जनपद तबादला होने के बाद डॉ. नीता साहू नई सीएमएस बनीं थी। नौ जनवरी को उन्होंने सीएमएस पद पर कार्यभार ग्रहण किया था।
जिस गाड़ी पर सवार होकर सीएमएस आईं थीं, उस चार पहिया गाड़ी (यूपी 70 डीएन 0063) पर भाजपा का झंडा और स्टीकर चस्पा था। स्टीकर में डॉ. नीता योगिनी वरिष्ठ समाजसेवी, प्रयागराज लिखा हुआ था और उनकी फोटो लगी थी। गाड़ी पर नीली बत्ती भी लगी थी।
आचार संहिता उल्लंघन का मामला प्रकाश में आने पर तत्कालीन डीएम ने सीएमओ को जांच करके रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। सीएमओ की रिपोर्ट आने के बाद आयोग को डीएम ने रिपोर्ट भेज दी थी।
जांच में सीएमएस प्रथम दृष्टया आचार संहिता के उल्लंघन की दोषी पाईं गईं। सचिव रविंद्र ने पत्र जारी करके सीएसएस के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के लिए निदेशक (प्रशासन) को जांच सौंपी है। मामले की जांच चल रही है। जल्द ही सीएमएस पर गाज गिर सकती है।
डीएम की संस्तुति के बाद सीएमएस की मुश्किलें और बढ़ीं
जिला अस्पताल में दो मरीजों की मौत के मामले में जांच में लापरवाही और अभद्र व्यवहार की प्रथम दृष्टया दोषी मिलीं सीएमएस की मुसीबतें और बढ़ गईं हैं। सीएमओ और सिटी मजिस्ट्रेट की जांच रिपोर्ट आने के बाद डीएम माला श्रीवास्तव ने सीएमएस के खिलाफ जांच और कार्रवाई के लिए शासन से संस्तुति कर दी है।
इसके अलावा दवा की खरीद में मानकों की अनदेखी के मामले की जांच भी अपर निदेशक डॉ. जीएस बाजपेयी कर रहे हैं। यह मामला भी सीएमएस के अलावा अन्य लोगों के गले की फांस बन गया है।
जिला अस्पताल की सीएमएस के खिलाफ आचार संहिता उल्लंघन के मामले की जांच शासन स्तर से कराई जा रही है। मामले में मांगी गई रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करा दी गई है। विभागीय कार्रवाई के लिए जांच निदेशक प्रशासन को दी गई है।
डॉ. वीरेंद्र सिंह, सीएमओ