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597 स्कूली वाहनों के फिटनेस खत्म, संचालन पर रोक

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रायबरेली में 24 अप्रैल के अंक में अमर उजाला में प्रकाशित खबर। - फोटो : RAIBARAILY
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रायबरेली। गाजियाबाद की घटना के बाद भी बिना फिटनेस व परमिट के वाहनों का संचालन करके मासूमों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। अमर उजाला में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेकर अफसरों ने जांच की तो जिले के 120 से अधिक स्कूलों के 750 में 597 वाहनों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (फिटनेस) खत्म मिले। मामले में एआरटीओ (प्रशासन) आरके सरोज ने 120 स्कूल संचालकों को नोटिस देकर सात दिन में वाहनों के फिटनेस करवाने के आदेश दिए हैं। इस दौरान स्कूली वाहनों के संचालन पर रोक लगा दी है। इससे मनमाने स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
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गाजियाबाद के एक निजी स्कूल की बस में जा रहे मासूम की खिड़की से सिर बाहर निकालते खंभे से जा टकरा जाने से मौत हो गई थी। संबंधित बस का फिटनेस तक नहीं था। यह मनमानी सामने आने के बाद परिवहन आयुक्त ने स्कूली वाहनों के फिटनेस के साथ ही अन्य मानकों के जांच के आदेश दिए हैं। इसके लिए जिले में अभियान भी चलाया जा रहा है। स्थिति यह है कि जिले के प्रतिष्ठित स्कूलों के संचालक तक बसों, मैजिक व टेंपों के फिटनेस नहीं करवा रहे हैं। बिना फिटनेस के ही वाहनों का संचालन करके बच्चों की जान को खतरे में डाल रहे हैं।
अमर उजाला ने 24 अप्रैल के अंक में 350 अनफिट वाहनों से ढो रहे बच्चे शीर्षक से खबर प्रकाशित किया। सोमवार को दफ्तर खुलते ही एआरटीओ ने खबर को गंभीरता से लेते हुए स्कूली वाहनों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों की ऑनलाइन जांच कराई तो कुल 750 स्कूली वाहनों में 597 वाहनों के फिटनेस खत्म मिले। जांच में इतनी बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। एक ओर शासन की ओर से बिना फिटनेस के स्कूली वाहनों पर शिकंजा कसा गया है, वहीं जिले में एक तिहाई से अधिक स्कूली वाहनों के फिटनेस खत्म हो गए हैं। मामले में एआरटीओ ने 120 से अधिक स्कूल संचालकों को नोटिस देकर एक सप्ताह के अंदर वाहनों के फिटनेस करवाने के आदेश दिए हैं। इस दौरान बिना फिटनेस के वाहनों का संचालन न कराने के आदेश दिए हैं। विभाग के गंभीर होने के बाद मनमाने स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
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फिटनेस के साथ ही स्कूली वाहनों के बीमे भी नहीं
वाहन बीमे की किस्त काफी अधिक होने के कारण स्कूल संचालक बसों व अन्य स्कूली वाहनों का बीमा तक नहीं करवा रहे हैं। बिना बीमा और प्रदूषण जांच के बाद वाहनों का फिटनेस नहीं हो सकता है। बिना बीमा और फिटनेस के ही मनमाने तरीके से स्कूली वाहनों का संचालन कराया जा रहा है। तमाम स्कूली वाहन ऐसे हैं जिनका बीमा कई वर्षों से नहीं हुआ है। रामभरोसे ही ये वाहन संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा फिटनेस के लिए स्कूल संचालकों को अन्य मानकों को भी पूरा कराना पड़ता है। 100 से अधिक ऐसी बसें हैं जो फिटनेस के लिए मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं।
जिले के स्कूलों के 597 वाहनों के फिटनेस खत्म हो गए हैं। 120 से अधिक स्कूलों के संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। सभी को सात दिन में वाहनों के फिटनेस करवाने के आदेश दिए गए हैं। वाहनों के संचालन को भी रोका गया है। बिना फिटनेस के वाहनों से हादसे होने की दशा में स्कूलों के संचालक ही पूरी तरह से जिम्मेदार होंगे। एक सप्ताह में फिटनेस न करवाने पर पंजीयन निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। -आरके सरोज, एआरटीओ (प्रशासन)
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