सर्प दंश के बाद पीड़ित को लगने वाले एंटीस्नैक वेनम की न्यू पीएचसी पर दरकार है। विभाग की ओर से सीएचसी को ही एंटीस्नैक वेनम उपलब्ध कराया गया है। ऐसे में पीड़ितों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हर दूसरे दिन औसतन जिला अस्पताल में सर्प दंश का एक पीड़ित पहुंच रहा है।
जिला अस्पताल में दो महीने में करीब 150 एंटीस्नैक वेनम खर्च हो चुके हैं। बारिश का मौसम आने के साथ ही जिले में सर्पदंश की घटनाएं बढ़ गई हैं। जिले में 13 सीएचसी व 48 न्यू पीएचसी हैं। विभाग की ओर से सभी सीएचसी को 10-10 एंटीस्नैक वेनम उपलब्ध कराए गए हैं, लेकिन न्यू पीएचसी को एंटीस्नैक वेनम नहीं दिए गए हैं।
ऐसी स्थिति में पीड़ितों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। ज्यादातर पीड़ित परेशानी से बचने के लिए सीधे जिला अस्पताल पहुंच जाते हैं, क्योंकि जिला अस्पताल में एंटीस्नैक वेनम मिलना तय होता है। जिला अस्पताल में दो महीने में करीब डेढ़ एंटीस्नैक वेनम खप गए हैं।
जिला अस्पताल के डॉक्टर बीरबल का कहना है कि 60 फीसदी सर्प के दंश से पीड़ित की मौत नहीं होती है। लोग सर्पदंश के बाद घबरा जाते हैं। इसीलिए मौत हो जाती है। सर्पदंश के बाद कतई न घबराएं। यदि घबरा गए तो दिक्कत आ सकती है। सर्र्पदंश के बाद तुरंत नजदीक की सीएचसी या जिला अस्पताल में पीड़ित को पहुंचाएं। समय से एंटीस्नैक वेनम लगने से रोगी को बचाया जा सकता है। लापरवाही कतई न की जाए।