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निपुण भारत से मजबूत होगी नौनिहालों की शिक्षा की नींव

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रायबरेली। मिशन प्रेरणा फेज-2 के रूप में निपुण भारत मिशन को परिषदीय विद्यालयों में लागू किया गया है। यह मिशन प्रेरणा का ही बदला स्वरूप है। इसके मानक और लक्ष्य में बदलाव किया गया है।
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मिशन प्रेरणा में पहली से लेकर पांचवीं कक्षा तक के लक्ष्य तय थे, जबकि निपुण भारत में प्री-प्राइमरी से कक्षा तीन तक के लक्ष्य निर्धारित हैं।
प्री-प्राइमरी को बाल वाटिका का नाम दिया गया है। जिसमें आंगनबाड़ी के बच्चों को रुचि पूर्ण शिक्षा देकर कक्षा एक के लिए तैयार किया जा सकेगा।
जिले में 2298 परिषदीय विद्यालय हैं, जिनमें तीन लाख से अधिक बच्चों का नामांकन हो चुका है। निपुण भारत के क्रियान्वयन एवं अनुश्रवण के लिए जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय टास्क फोर्स गठित हो चुकी है।
हर विद्यालय के एक शिक्षक को प्रशिक्षित कर नोडल बनाया जा चुका है। निपुण भारत से नौनिहालों की शिक्षा की नींव मजबूत की जाएगी, जिससे उन्हें आगे की पढ़ाई में मदद मिल सके। बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के समन्वय से यह प्रयास होगा कि पांच वर्ष की आयु से कम का प्रत्येक बच्चा प्रिपरेटरी कक्षा या बाल वाटिका में जा सके।
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निपुण भारत का लक्ष्य
भाषा के लिए
बाल वाटिका - अक्षरों और संगत ध्वनियों को पहचान लेते हैं। कम से कम दो अक्षर वाले सरल शब्दों को पढ़ लेते हैं।
कक्षा-1 - अर्थ के साथ पढ़ लेते हैं। ऐसे छोटे वाक्य, जो आयु के अनुसार किसी अज्ञात पाठ का भाग हो, जिसमें चार-पांच सरल शब्द हों को पढ़ लेते हैं।
कक्षा-2 - अर्थ के साथ पढ़ लेते हैं। 45-60 शब्द प्रति मिनट प्रवाह के साथ पढ़ लेते हैं।
कक्षा-3 - अर्थ के साथ पढ़ लेते हैं। न्यूनतम 60 शब्द प्रति मिनट के प्रवाह से पढ़ लेते हैं।
गणित के लिए
बाल वाटिका - 10 तक के अंकों को पहचान और पढ़ लेते हैं। एक क्रम में घटनाओं की संख्या, वस्तुओं, आकृतियों, घटनाओं को व्यवस्थित कर लेते हैं।
कक्षा-1 - 99 तक संख्या पढ़ एवं लिख लेते हैं। सरल जोड़ और घटाव कर लेते हैं।
कक्षा-2 - 999 तक संख्या पढ़ एवं लिख लेते हैं। 99 तक संख्याओं का घटाव कर लेते हैं।
कक्षा-3 - 9999 तक संख्या पढ़ एवं लिख लेते हैं। सरल गुणा समस्याओं को हल कर लेते हैं।
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