रायबरेली। ग्राम पंचायतों में अब सभी तरह के भुगतान पर जीएसटी (गुड्स सर्विस टैक्स) को अनिवार्य कर दिया गया है। ताकि फर्जी फर्मों के नाम से होने वाले भुगतान को प्रभावी स्तर पर रोका जा सके। इसके लिए प्रमुख सचिव के निर्देश पर सभी 980 ग्राम पंचायतों की जीएसटी बनवाने के आदेश भी जारी कर दिए गए हैं। साथ ही कहा गया है कि बिना जीएसटी नंबर के किसी भी फर्म को कोई भुगतान न दिया जाए।
पंचायतीराज विभाग ने भुगतान में मनमानी और ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर मनमाने बिल-वाउचर फीड किए जाने के खुलासे के बाद ग्राम पंचायतों को जीएसटीएन आवंटित कराए जाने का निर्णय लिया गया है। ग्राम पंचायतों में जीएसटीएन आवंटन के लिए पंचायतीराज विभाग ने पंचायत सचिवों को जिम्मेदारी सौंपी है। बिना जीएसटी नंबर के भुगतान न करने के आदेश दिए गए हैं। ऐसा होने के बाद पंचायतीराज विभाग के माध्यम से मिलने वाले राज्य वित्त और केंद्रीय वित्त आयोग के साथ ही खुद की आमदनी के रुपये से भुगतान के समय ही सामग्री के अनुसार जीएसटी की कटौती करनी होगी।
डीपीआरओ सौम्यशील सिंह ने बताया कि ग्राम पंचायतों में अब सामग्री पर तय दर के अनुसार भुगतान के समय जीएसटी की कटौती को अनिवार्य किया गया है। इससे ग्राम पंचायतें फर्जी फर्मों को भुगतान नहीं कर पाएंगी। फर्म को भुगतान करने पर जीएसटी कटौती होते ही जीएसटी विभाग को संबंधित फर्म की जानकारी हो जाएगी।
जीएसटी विभाग के समन्वय से लगेगा शिविर
ग्राम पंचायतों के जीएसटी विभाग में पंजीयन के लिए पंचायतीराज विभाग ने जीएसटी विभाग के समन्वय से शिविर लगाने के निर्णय लिया है। सलोन ब्लॉक से यह काम शुरू होगा। सभी ग्राम पंचायतों का जीएसटी नंबर जारी होने के बाद भुगतान की प्रक्रिया शुरू होगी।