रायबरेली। रॉयन स्कूल के अस्पताल में भर्ती कोरोना मरीजों के भोजन का स्वाद बदल गया है। दो दिन से परोसे जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर कोरोना संक्रमित पूर्व सपा विधायक के भाई ने व अन्य मरीजों ने सवाल खड़ा कर दिया है। आरोप है कि दो दिन पहले तक अच्छा भोजन दिया गया, लेकिन अब भोजन की गुणवत्ता पूरी तरह से बदल गई है। मामला प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचने के बाद लखनऊ की फर्म को अच्छा से अच्छा भोजन परोसने के आदेश दिए गए हैं। ऐसा न करने पर संस्था को ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई है।
रॉयन स्कूल के अस्पताल में भर्ती मरीजों और चिकित्सीय स्टाफ के लिए भोजन की व्यवस्था है। पूर्व में चिकित्सीय स्टाफ के लिए प्रतिदिन 500 रुपये और मरीजों के 100 रुपये का भोजन देने की व्यवस्था थी। पूर्व में जिले की एक संस्था को मरीजों और चिकित्सीय स्टाफ को भोजन देने का काम दिया गया था। संस्था ने चिकित्सीय स्टाफ के साथ ही मरीजों को भी अच्छा भोजन परोसा, लेकिन जब भुगतान का समय आया तो भुगतान में काफी कटौती कर दी गई। लागत भी न मिलने पर संस्था ने काम करना बंद कर दिया।
अब स्वास्थ्य विभाग ने मांश्रिता इंफाकॉम बिजनेस मालरोड दुबग्गा लखनऊ को कोरोना संक्रमित मरीजों को भोजन देने का जिम्मा दिया गया है। फर्म ने एक जुलाई से भोजन देना शुरू किया। बताते हैं कि पहले ही दिन सपा के पूर्व विधायक के कोरोना संक्रमित भाई ने मरीजों को दिए जा रहे भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठा दिया। मामला डीएम और सीडीओ तक पहुंच गया। सीएमओ ने फर्म के संचालक को बुलाकर भोजन की गुणवत्ता में सुधार लाने के आदेश दिए हैं। ऐसा न करने पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
रॉयन स्कूल के अस्पताल में भर्ती मरीजों के भोजन पर शासन से प्रतिदिन 100 रुपये की व्यवस्था की गई है। पुरानी फर्म चिकित्सीय स्टाफ के साथ ही मरीजों को भी एक जैसा भोजन दे रही थी, लेकिन भुगतान 100 रुपये के हिसाब से करने के लिए कटौती किए जाने के कारण दूसरी फर्म ने भोजन देने का काम शुरू किया है। इसीलिए गुणवत्ता में कुछ बदलाव आया है।- डॉ. संजय कुमार शर्मा, सीएमओ