रायबरेली। अमेरिका-इजराइल और ईरान युद्ध का असर अब जिले के विकास पर दिखने लगा है। यही वजह है कि तारकोल (डामर) की कमी से 300 से ज्यादा सड़कों का निर्माण और मरम्मत कार्य ठप हो गया है।
तारकोल के बढ़ी कीमतों से जेब ढीली होने से ठेकेदार भी परेशान हैं और काम बंद करा दिया है। इससे राहगीरों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ठेकेदार तारकोल की कीमतें घटने या फिर दोबारा टेंडर प्रक्रिया कराए जाने की बात कह रहे हैं।
सड़कों के निर्माण में सबसे ज्यादा तारकोल का प्रयोग होता है। यह तारकोल इंडियन ऑयल मथुरा से मिलता है। यहां पर कमी के चलते जिले में इसका असर पड़ा है। पहले यह तारकोल 50 रुपये प्रति किलो रुपये में मिलता था, लेकिन युद्ध के चलते अब तारकोल के दाम 80 से 90 रुपये प्रति किलो हो गए हैं। इसके चलते ठेकेदारों ने काम बंद कर दिया है। मुंशीगंज-डलमऊ राजमार्ग का चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण काम रफ्तार पकड़ने से पहले ही थम गया है। इसी तरह नरपतगंज से कठगर मार्ग को जोड़ने वाले मार्ग पर केवल गिट्टियां डाल दी गईं हैं। इसके बाद नवीनीकरण नहीं कराया गया है। इसी तरह दीनशाह गौरा ब्लॉक में कुचरिया से मुंशीगंज जिला मुख्यालय जोड़ने वाला भी खस्ताहाल है। बताते हैं कि उत्पादन में आई कमी से तारकोल के दाम बढ़े हैं।
जल्द हो समस्या का समाधान
लोक निर्माण विभाग के ठेकेदार आनंद तिवारी, आशीष सिंह, रोहित बाजपेयी का कहना है कि तारकोल की कमी और बढ़ती कीमतों से सड़कों का निर्माण और मरम्मत कार्य बंद हो गया है। यदि काम कराया जाता है तो लागत और आएगा। इससे नुकसान उठाना पड़ेगा। ऐसे में सड़कों का निर्माण और मरम्मत कार्य कराने से कदम पीछे हटने पड़े हैं। यदि तारकोल की आपूर्ति और कीमतों की समस्या का समाधान शीघ्र नहीं किया गया तो स्थिति बदतर हो जाएगी। विभाग से सड़कों की लागत में बढ़ोत्तरी की मांग की है।
इनसेट
हमारे पास जितना तारकोल है, उससे कम लंबाई और आवश्यक सड़कों का निर्माण कराया जा रहा है। कच्चे माल की आपूर्ति मिलने पर तारकोल ठेकेदारों को उपलब्ध कराया जाएगा। फिलहाल कीमत बढ़ी हैं। इसकी रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। शासन से जो भी दिशानिर्देश मिलेंगे, उसी हिसाब से आगे की व्यवस्था होगी।
महिपाल सिंह, अधिशासी अभियंता, लोक निर्माण विभाग