रायबरेली। सांसद सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में पूरी तरह से दम तोड़ चुकी कांग्रेस विधान परिषद सदस्य पद के चुनाव से भी अब आउट हो गई है। विधानसभा चुनाव में सभी छह सीटों पर करारी हार के बाद कांग्रेस के साथ ही बसपा भी इस चुनाव में कूदने की हिम्मत तक नहीं जुटा सकी है। ऐसी स्थिति में विधानसभा चुनाव की तरह जिले में एमएलसी पद के लिए भी सपा और भाजपा में ही सीधी टक्कर की संभावना जताई जा रही है।
विधानसभा चुनाव में शून्य हुई कांग्रेस और बसपा विधान परिषद सदस्य पद के चुनाव में आउट हो गई है। दोनों ही पार्टियां इस चुनाव में कूदने की हिम्मत तक नहीं जुटा सकी हैं। कांग्रेस से उम्मीदवार आने की कयासबाजी चल रही थी, लेकिन सोमवार को नामांकन पूरा होने के बाद इस पर भी विराम लग गया। दोनों पार्टियों से उम्मीदवार न आने के कारण अब भाजपा और सपा में इस चुनाव में भी सीधी टक्कर की संभावना है। हालांकि जिले की छह में से चार विधानसभा क्षेत्र की सीटों पर काबिज सपा इस बार एमएलसी चुनाव में पूरे दमखम के साथ मैदान में है।
मालूम रहे कि विधानसभा चुनाव-2022 में जिले की सभी सीटों से कांग्रेस साफ हो गई। 60 साल में यह पहली बार हुआ है कि जिले की एक भी सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार नहीं जीत सका। यहां तक कि किसी भी सीट पर कांग्रेस का उम्मीदवार दूसरे स्थान पर भी नहीं पहुंच सका। इसका प्रमुख कारण जिले में कांग्रेस का समय से प्रत्याशी न खोज पाना भी रहा है। जिले की विधानसभा क्षेत्र ऊंचाहार सीट पर भाजपा से आए अतुल और हरचंदपुर में सपा से आए सुरेंद्र विक्रम सिंह पर दांव लगाया गया था।
सरेनी में भी भाजपा में टिकट न मिलने पर सुधा द्विवेदी कांग्रेस से मैदान में उतरी थीं। सदर सीट से कांग्रेस ने चिकित्सक डॉ. मनीष सिंह पर दांव लगाया, लेकिन सभी सीटों पर कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा। बसपा भी जिले की किसी भी सीट पर अच्छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। (संवाद)