रायबरेली। पहले दिन-रात एक करके आलू की फसल का उत्पादन किया। पैदावार हुई तो अब आलू भंडारण के लिए किसानों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।
कोल्ड स्टोरेज फुल हो गए हैं। शीतगृहों के सामने आलू भरे ट्रक खड़े हैं, लेकिन जगह न होने के कारण उन्हें खाली नहीं किया जा रहा है। ट्रकों में भरा आलू सड़ रहा है, लेकिन किसानों की यह पीड़ा देखने और सुनने वाला कोई नहीं है। दरअसल, शीतगृहों में भंडारण की क्षमता कम है।
इस बार आलू उत्पादन बंपर हुआ है। ऐसे में आलू का अधिक उत्पादन होना और भंडारण क्षमता कम होना किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
जिले में इस बार 50 हजार किसानों ने छह हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल पर आलू की खेती की थी। जिले में ढाई लाख मीट्रिक टन से ज्यादा आलू का उत्पादन हुआ है।
अभी आलू की खोदाई भी चल रही है। एक लाख 20 हजार मीट्रिक टन आलू का उत्पादन सिर्फ सलोन तहसील क्षेत्र में हुआ है। सलोन को आलू उत्पादन के लिए मिनी फर्रुखाबाद भी कहा जाता है।
जिला उद्यान विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में मौजूदा समय में कुल 24 कोल्ड स्टोरेज हैं। इन कोल्ड स्टोरेज में एक लाख 87 हजार 609 मीट्रिक टन आलू भंडारण की क्षमता है। 24 कोल्ड स्टोरेज में से 16 कोल्ड स्टोरेज पूरी तरह से फुल हो गए हैं। बचे शेष आठ कोल्ड स्टोरेज भी लगभग भर चुके हैं।
किसी में 40 बोरी तो किसी में 20 बोरी आलू भंडारण की क्षमता शेष बची है। किसान ट्रकों पर आलू लादकर कोल्ड स्टोरेज पहुंच रहे हैं, लेकिन जगह न होने के कारण शीतगृह मालिक आलू भंडारण से इंकार कर रहे हैं। ऐेसे में किसानों के आलू से भरे ट्रक शीतगृह के सामने कई दिन से खड़े हैं।
आलू भंडारण न होने से आलू वाहनों में ही सड़ रहा है। ऐसे में सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि आलू भंडारण के लिए किसानों को किस तरह परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
सात कोल्ड स्टोरेज में लटक गया ताला
वैसे तो जिले में 31 कोल्ड स्टोरेज थे, लेकिन इधर सात कोल्ड स्टोरेज में ताला लटक गया। शीतगृह मालिकों की ओर से कोल्ड स्टोरेज बंद कर दिए जाने के कारण इस बार आलू भंडारण की क्षमता और कम हो गई।
अधिकारी बताते हैं कि पिछले साल ये कोल्ड स्टोरेज फुल नहीं हो पाए थे। घाटा होने के कारण मालिकों ने इस बार कोल्ड स्टोरेज को बंद कर दिया। नतीजतन इस बार किसानों के सामने भंडारण की समस्या आ खड़ी हुुई, जिसके चलते उन्हें परेशानी झेलनी पड़ रही है।
भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज के सामने रात बिता रहे किसान
ऊंचाहार। आलू की अच्छी उपज किसानों के लिए मुसीबत बन गई है। तहसील क्षेत्र में संचालित कोल्ड स्टोरों के फुल होने से हजारों बोरी आलू सड़ने की कगार पर है।
सड़क किनारे आलू लदे वाहनों की लंबी कतारें लगी हुई हैं। लगातार बढ़ रही गर्मी व धूप वाहनों पर लदे आलू के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। हालात यह है कि किसान फसल भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज के बाहर सोने को मजबूर है।
आलू भंडारण के लिए तहसील क्षेत्र में छह शीत गृह संचालित हैं। इसमें ऊंचाहार ब्लाक में अरखा कोल्ड स्टोरेज अरखा, जामो कोल्ड स्टोरेज मदारीगंज, शुभम शीत गृह सवैया तिराहा, कछवाह कोल्ड स्टोरेज चडरई व जगतपुर में प्रेम शीत गृह जिगना व शिव कोल्ड स्टोरेज नवाबगंज हैं। इन शीत गृहों की भंडारण क्षमता लगभग सात लाख बोरी है।
बताते हैं कि इस वर्ष आलू की बंपर पैदावार की वजह से ऊंचाहार ब्लॉक के तीन कोल्ड स्टोरेज फुल हो चुके हैं, जबकि कछवाह कोल्ड कई वर्षों से बंद चल रहा है।
वहीं जगतपुर का प्रेमशीत गृह लगभग भरने की कगार पर है, जबकि नवाबगंज में भंडारण मंद गति से हो रहा है। अब तक लगभग साढ़े पांच लाख बोरी आलू का भंडारण हो चुका है।
कोल्ड स्टोरेजों के फुल होने से किसान आलू भंडारण के लिए परेशान हैं। शीतगृहों के सामने सड़क पर आलू लदे वाहनों की लंबी कतार लगी हुई है। गर्मी व धूप की तपिश से आलू के सडने का खतरा मंडरा रहा है। वहीं सैकड़ों बीघा आलू खुदाई के लिए खेतों में पड़ा है।
आलू भंडारण न होने से किसान परेशान हैं। किसान दिनेश सिंह, राजेश सिंह, वासुदेव, शीतला, जागेश्वर, कालिका, शिव कुमार ने बताया कि कोल्ड स्टोरों के चक्कर लगा रहा हूं, लेकिन आलू रखने के लिए कहीं जगह नहीं मिल रही है। हर जगह लंबी लाइन है। कई दिनों से सड़क किनारे आलू लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली खड़ी हुई है। उधर, एसडीएम राजेश कुमार ने बताया कि आलू भंडारण को लेकर शीत गृह स्वामियों को निर्देश दिए गए हैं।
जिले में संचालित 24 कोल्ड स्टोरेज में आलू भंडारण कराने का प्रयास किया जा रहा है। बड़े किसानों के साथ ही छोटे किसानों का आलू भी शीतगृहों में रखवाया जा रहा है। छह कोल्ड स्टोरेज बंद होने के कारण समस्या आ रही है। इस बार आलू उत्पादन भी बंपर हुआ है। यह भी भंडारण के लिए एक चुनौती है। फिलहाल प्रयास किया जा रहा है कि आलू भंडारण में किसानों को परेशानी ना होने पाए। 16 कोल्ड स्टोरेज फुल हो गए हैं।
केशवराम, जिला उद्यान अधिकारी