रायबरेली। होली जैसे खुशी के मौके पर चंद रुपयों की खातिर लोगों को जहरीली कचरी खिलाई जा रही थी। कचरी बनाने में जहरीले सिंथेटिक कलर का प्रयोग किया जा रहा था। लखनऊ लैब में जांच में कचरी में डाले गए पीला, नारंगी रंग और कचरी का नमूना फेल हो गया है। लैब से आई रिपोर्ट के बाद इसका खुलासा हुआ तो हड़कंप मच गया। इस कचरी के खाने से लोगों को कई घातक बीमारियां हो सकती हैं। इसके अलावा एक बेसन का नमूना भी फेल हो गया है। इसमें भी जहरीले सिंथेटिक कलर का प्रयोग किया गया था।
एफएसडीए के अभिहीत अधिकारी शशांक त्रिपाठी, मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी इंद्र बहादुर यादव की टीम ने मुंशीगंज स्थित रचित गोल्ड कचरी फैक्टरी में बीती पांच मार्च को छापा मारा था। इस फैक्टरी के प्रोपराइटर प्रिया मुरारका हैं। अफसरों की टीम ने तैयार की गई कचरी को मिलावटी बताते हुए सीज कर दिया था। साथ ही यहां से पीला, नारंगी रंग और कचरी का नमूना लेकर जांच के लिए लखनऊ लैब भेजा था। लखनऊ लैब में तीनों नमूने जांच में फेल पाए गए।
अफसरों के मुताबिक कचरी में खाने योग्य पीला रंग का प्रयोग न करके प्रतिबंधित सिंथेटिक कलर का प्रयोग किया गया था, जो जहरीला होता है। इसी तरह नारंगी रंग के नमूने में जांच में पाया गया कि इसमें प्रतिबंधित अखाद्य रंग सूडान द्वितीय मिला था, जो जहरीला होता है। कचरी के नमूने में जहरीला रोडामीन बी प्रतिबंधित सिंथेटिक कलर लाल रंग पाया गया। यह भी जहरीला होता है।
यहां पर तैयार कचरी होली पर दुकानदारों के माध्यम से लोगों को बेची जा रही थी। इसी माह की 14 मार्च को दक्षिणी जहानाबादग में मो. तारिक के यहां से बेसन का नमूना लिया गया था। मेरठ की लैब से आई रिपोर्ट में बेसन का नमूना फेल हो गया। रिपोर्ट में पाया गया कि बेसन में सिंथेटिक कलर (खतरनाक) का प्रयोग किया गया था। कचरी बनाने वाले प्रोपराइटर और बेसन बेचने वाले दुकानदार को नोटिस जारी की गई है।
किडनी, लीवर और आंख पर पड़ता है असर
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. बीरबल का कहना है कि सिंथेटिक कलर से तैयार की गई कचरी जहरीली हो जाती है। इसके खाने से लोगों की किडनी, लीवर के साथ ही आंख पर असर पड़ता है। यहां तक लंबे समय तक कचरी खाने से कैंसर तक होने का खतरा रहता है।
वर्जन
मुंशीगंज स्थित फैक्टरी से लिए गए कचरी और रंग के नमूने जांच में फेल पाए गए हैं। इसमें सिंथेटिक कलर के प्रयोग की बात जांच में पाई गई है, जो जहरीला होता है। इसके खाने से लोगों में गंभीर बीमारियां होने का खतरा रहता है। साथ ही बेसन का नमूना भी फेल पाया गया है। कचरी बनाने वाले प्रोपराइटर और बेसन बेचने वाले दुकानदार को नोटिस जारी की गई है।
- शशांक त्रिपाठी, अभिहित अधिकारी, एफएसडीए