रायबरेली में बेसिक शिक्षा विभाग के 407 दलित शिक्षकों को पदावनत करने का आदेश निरस्त कर दिया गया है। इस मामले में बेसिक शिक्षा निदेशक ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, रायबरेली को अपने निर्णय की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए थे, जिसके बाद उन्होंने यह फैसला किया।
पदावनति आदेश निरस्त होने पर इन शिक्षकों के लिए संघर्ष कर रही आरक्षण बताओ संघर्ष समिति ने इसे इंसाफ की जीत बताया। बेसिक शिक्षा के 407 दलित शिक्षकों को विगत 20 मई को रिवर्ट कर दिया गया था। इसे सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत की गई कार्रवाई बताया गया था।
जिसमें कोर्ट ने पदोन्नति में आरक्षण का लाभ लेने वालों को पुराने पद पर भेजने का फैसला सुनाया था। इस मामले को लेकर कई दिनों से दलित शिक्षक आंदोलन कर रहे थे। उनका कहना था कि उन्हें पदोन्नति बैकलॉग के पदों पर दी गई है।
उन्हें पदोन्नति में आरक्षण का लाभ नहीं मिला। इसके अलावा उनके साथ के सामान्य वर्ग के ज्यादातर शिक्षक भी पदोन्नति पा चुके हैं। इसलिए उनकी पदावनति न्यायोचित नहीं है। इस मुद्दे को लेकर आरक्षण बचाओ संघर्ष समिति ने 23 मई को बेसिक शिक्षा निदेशक के कार्यालय का घेराव किया था।
इस पर बेसिक शिक्षा निदेशक दिनेश बाबू शर्मा ने बेसिक शिक्षा परिषद इलाहाबाद के सचिव और रायबरेली के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी को अपने फैसले की समीक्षा के निर्देश दिए थे। इसके बाद रायबरेली के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने 407 दलित शिक्षकों के पदावनति आदेश को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया।
उधर, सोमवार को इस मुद्दे पर हुई संघर्ष समिति की प्रांतीय कार्यसमिति की बैठक में सभी विभागों में गलत ढंग से हुई पदावनति वापस लिए जाने की मांग की। साथ ही कहा कि उनकी मांग न माने जाने पर आर-पार की लड़ाई लड़ी जाएगी।
बैठक में समिति के संयोजक अवधेश कुमार वर्मा, केबी राम, डॉ. रामशब्द जैसवारा, आरपी केन, अनिल कुमार, महेंद्र सिंह आदि मौजूद रहे। वहीं प्रभारी बीएसए/खंड शिक्षा अधिकारी शशि प्रभा ने बताया कि बीएसए अवकाश पर हैं और उन्हें इस मामले में अभी कोई जानकारी नहीं है।