लंबे समय कोर्ट के निर्णय पर निगाह गड़ाए शिक्षामित्रों को मायूसी हाथ लगी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के शिक्षामित्रों के समायोजन रद्द करने संबंधी आदेश से जिले के 2202 सहायक अध्यापक फिर से शिक्षामित्र हो जाएंगे। इससे जिले में एक बार फिर शिक्षकों का भारी संकट हो जाएगा।
प्रदेश सरकार की मंशा पर जिले में 2202 शिक्षामित्रों का समायोजन करके उन्हें सहायक अध्यापक बनाया गया था। दो बार काउंसलिंग करके समायोजन की प्रक्रिया को पूरा कराया गया था।
पहले चरण में 1269 और दूसरे चरण में 933 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाया गया था। शिक्षक बनाने के बाद शिक्षामित्रों को वेतन भी दिया जा रहा है।
शिक्षामित्रों के समायोजन का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को मामले में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक के पदों पर किए गए समायोजन को गलत करार दिया है।
इससे शिक्षामित्रों को करारा झटका लगा है। जिले में 2202 शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाकर स्कूलों में तैनात किया गया था। अब ये सब फिर शिक्षामित्र बन जाएंगे।
हाईकोर्ट का फैसला आने और नौकरी जाने से उनके चेहरे मुरझा गए हैं। शिक्षक पद पर समायोजित कई शिक्षामित्रों की सरकारी नौकरी मिलने की उम्र सीमा समाप्त हो चुकी है।
वहीं जिले में 100 से अधिक स्कूलों में शिक्षामित्रों को सहायक अध्यापक बनाकर भेजा गया था। समायोजन समाप्त होने के बाद अब वे स्कूल बिना शिक्षक के हो जाएंगे।
साथ ही जिले में 2202 शिक्षकों की फिर से कमी आ जाएगी। शिक्षण व्यवस्था पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है। खासकर स्कूलों में शिक्षक न होने के कारण अन्य कार्य भी संबंधित स्कूलों में प्रभावित हो जाएगा।
वहीं फैसले को लेकर दिन भर तमाम शिक्षामित्र नाराजगी व्यक्त करते रहे।