पट्टी विकास खंड में दर्जनों मॉडल तालाब व नहरों का जाल बिछा होने के बाद भी ग्रामीण पानी की मार से बेहाल हैं। इलाके में जल संरक्षण की व्यवस्था न होने से जलस्तर दिनों दिन नीचे खिसक रहा है। हालात यह है कि पालतू मवेशियों को भी पानी की व्यवस्था करने में पशुपालकों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। जलस्तर गिरने की हालत यही रही तो आने वाले दिनों में फसलों पर भी सूखे का असर होगा।
विकास खंड की 62 ग्राम सभाओं में सरकार द्वारा ढाई हजार से अधिक हैंडपंप लगाए गए है। इसके अलावा निजी नल व पंपिग सेट व जल निगम का पानी भी लोगों की प्यास बुझाने के लिये है। इन नलों में 327 नल पहले से खराब हैं जिनके रिबोर की सूची ब्लॉक से भेजी जा चुकी है। दूसरी ओर जल प्रबंधन के लिए बेलसंडी गांव में करोड़ों रुपये खर्च कर अगल बगल दो तालाब बनाये गए हैं। लेकिन बरसात के बाद से ही पानी नदारद है। एक तालाब तो परमीपट्टी महाविद्यालय के बगल ही बना था जिसमें बच्चों के लिए स्वीमिंग पूल बनाने की बात थी लेकिन वहां पशु पक्षियों के पीने तक को पानी नहीं है।
जो हैंडपंप लगे हैं मानक का सही इस्तेमाल न किए जाने के कारण वे बेकार हैं। आदर्श के रूप में मात्र एक तालाब परसनी गांव में दिखता है जो आजादी के पहले का बना है और उसमें ही पानी नजर आ रहा है। इसी तरह कस्बे के पूर्वी छोर पर दो निजी तालाब है जिनका अस्तित्व अभी कायम है। नहरों का हाल तो पूछिये ही नहीं है सबसे बड़ी नहर पट्टी मुख्यालय से गुजरती है लेकिन जौनपुर रजवहा काम कम, टूट कर किसानों का नुकसान जरूर करती है। इलाके में जो तालाब बने भी है उनमें बड़ी बड़ी दरारें नजर आ रही है। धूल उड़ रही है। तालाब खुदाई के नाम पर आये सरकारी धन का बंदरबांट किया गया। इन तालाबों को भरने के लिए कोई अलग से बजट न होने के कारण बरसात का पानी गायब होते ही इनमें धूल उड़ने लगती है। आलम यह हो जाता है कि पालतू मवेशियों के लिए भी पीने का पानी नहीं मिल पाता है।