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यूपी विधानसभा चुनाव 2022 : कुंडा में 1993 से राजाभैया का कब्जा, सपा-बसपा का नहीं खुला खाता 

Fri, 04 Feb 2022 07:51 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़

सार

कुंडा को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, मगर 1991 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उसका दुर्ग ढहा दिया। कुंडा में पहली बार कमल खिला।  कुंडा में कांग्रेस के नियाज हसन को भाजपा के शिवनारायण मिश्र ने करारी शिकस्त दी। फिर इसके बाद से कांग्रेस की जमीन खिसक गई। 1993 में कुंडा विधानसभा सीट से राजाभैया ने पहली बार चुनाव लड़ा।
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Prayagraj News : रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया। - फोटो : प्रयागराज
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विस्तार
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कुंडा विधानसभा सीट पर 1989 तक कांग्रेस का दबदबा रहा। इस दौरान हुए 10 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को सिर्फ तीन बार हार मिली। 1991 में यहां कमल भी खिला। इसके बाद कुंडा सीट पर निर्दल विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया ने कब्जा जमा लिया। 1993 से अब तक हुए छह विधानसभा चुनावों में वह लगातार निर्दल जीत दर्ज करते आ रहे हैं। 2022 के विधानसभा चुनाव में वह पहली बार अपनी पार्टी जनसत्ता दल से चुनाव लड़ेंगे। कुंडा सीट पर इस बार सपा और भाजपा ने घेराबंदी कर रखी है।

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कुंडा विधानसभा सीट पर आजादी के बाद से कुल 19 विधानसभा चुनाव हुए हैं। 1951 से 1989 तक हुए 10 विधानसभा चुनावों में सात बार कांग्रेस ने रिकार्ड तोड़ जीत दर्ज की। 1957 में निर्दल प्रत्याशी गया प्रसाद व 1969 में एसएसपी के जयराम यादव व 1977 में जनता दल की शशिप्रभा ने कांग्रेस के विजय रथ पर ब्रेक लगाया था। 1980, 1985 व 1989 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नियाज हसन ने जीत की हैट्रिक लगाई थी।



कुंडा को कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, मगर 1991 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने उसका दुर्ग ढहा दिया। कुंडा में पहली बार कमल खिला।  कुंडा में कांग्रेस के नियाज हसन को भाजपा के शिवनारायण मिश्र ने करारी शिकस्त दी। फिर इसके बाद से कांग्रेस की जमीन खिसक गई। 1993 में कुंडा विधानसभा सीट से राजाभैया ने पहली बार चुनाव लड़ा।

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पहली बार अपनी पार्टी से चुनाव लड़ेंगे राजाभैया
उन्होंने भाजपा के शिव नारायण मिश्र को करारी शिकस्त दी। इसके बाद राजाभैया ने पांच विधानसभा चुनावों में लगातार निर्दल प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की। इस बार चुनाव में पहली बार वह अपनी पार्टी जनसत्ता दल के बैनर तले चुनाव लड़ने जा रहे हैं।



कुंडा में 1991 व 1993 में सपा ने अपने प्रत्याशी उतारे थे। इसके बाद सपा राजाभैया को समर्थन देती रही। अब 27 साल बाद सपा ने फिर राजाभैया के सामने अपना उम्मीदवार खड़ा किया है। हालांकि कुंडा विधानसभा सीट पर अभी सपा-बसपा का खाता नहीं खुल सका है। 

कांग्रेस के नियाज हसन ने जीत की हैट्रिक, राजाभैया ने लगाई डबल हैट्रिक   
कुंडा में कांग्रेस के नियाज हसन जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। उन्होंने 1980, 1985 व 1989 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीन बार जीत दर्ज की थी। जबकि निर्दल विधायक रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया ने जीत की डबल हैट्रिक लगाई है। वह 1993 से 2017 तक लगातार विधायक चुुने गए। 



जातीय समीकरण 
कुंडा विधानसभा में तीन लाख 50 हजार 529 मतदाता हैं। इनमें सामान्य वर्ग के 107200 मतदाता हैं। जिनमें करीब 40 हजार ब्राह्मण, 21 हजार ठाकुर, 14 हजार वैश्य हैं। पिछड़ों में यादव, कुर्मी सहित कुल 104352 मतदाता हैं। एससी मतदाता करीब 85300 हैं। 53677 मुस्लिम मतदाता हैं।  
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कुंडा सीट से अब तक रहे विधायक 
वर्ष    विधायक    पार्टी
1951    रामस्वरूप भारती    कांग्रेस 
            राम नरेश शुक्ला 
1957    गया प्रसाद    आईएनडी 
1962    नियाज हसन    कांग्रेस  
1967    नियाज हसन    कांग्रेस  
1969    जयराम    एसएसपी 
1974    नियाज हसन    एनसीओ  
1977    शशि प्रभा    जेएनपी   
1980    नियाज हसन    कांग्रेस 
1985    नियाज हसन    कांग्रेस 
1989    नियाज हसन    कांग्रेस 
1991    शिवनारायण मिश्र    बीजेपी  
1993    रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया    निर्दल  
1996    रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया    निर्दल 
2002    रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया    निर्दल 
2007    राघुराज प्रताप प्रताप सिंह राजाभैया    निर्दल 
2012    रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया    निर्दल  
2017    रघुराज प्रताप सिंह राजाभैया    निर्दल
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