मीराभवन स्थित पीसीएफ गोदाम चेक करने के लिए बंद ताले को काटता कर्मचारी। संवाद
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ढाई करोड़ रुपये की डीएपी खाद बेचकर फरार होने वाले गोदाम प्रभारी की खोज करने में पुलिस नाकाम रही है। इधर बुधवार को पुलिस और पांच सदस्यीय जांच टीम की मौजूदगी में पीसीएफ के सील गोदामों का ताला काटकर खोला गया। गोदाम में एक भी बोरी भी डीएपी खाद नहीं मिली। जबकि एक गोदाम में यूरिया डंप मिली।
करोड़ों रुपये की डीएपी बेचने के मामले में जिलाधिकारी डॉ. नितिन बंसल द्वारा गठित जांच टीम बुधवार को पुलिस बल के साथ तीनों गोदामों पर पहुंचे। अधिकारियों ने अपनी मौजूदगी में तीनों गोदामों का ताला कटवाया। डीएपी गबन के बाद गोदाम के गेट पर जिला प्रबंधक ने भी ताला बंद करा दिया था। जबकि पहले से ही गोदाम के भंडार नायक संतोष पांडेय द्वारा ताला बंद किया गया था।
तहसीलदार सदर अरविंद कुमार और सहायक निबंधक अरविंद प्रकाश की मौजूदगी में तीनों गोदामों की छानबीन की गई। जहां से एक भी बोरी खाद नहीं मिली। जबकि एक गोदाम में यूरिया डंप थी। एक गोदाम में यूरिया की गिनी चुनी बोरियां ही मिली। अधिकारी अपनी मौजूदगी में पीसीएफ जिला प्रबंधक करे गोदामों का चार्ज देना चाह रहे थे। मगर जिला प्रबंधक का कहना था कि जब तक एक-एक बोरी की गिनती नहीं होगी, तब तक वह चार्ज नहीं लेंगे। इसके चलते देर शाम तक पीसीएफ में जांच दल और पुलिस कर्मियों का जमावड़ा लगा रहा।
संतोष के सहयोगी महेंद्र सिंह से पुलिस ने की पूछताछ
निलंबित गोदाम प्रभारी के सहयोगी महेंद्र सिंह से कोतवाली पुलिस ने ढाई करोड़ रुपये की डीएपी बेचने के मामले के पूछताछ किया। मगर वह हर सवाल पर नहीं मालूम होने की बात कहता रहा, जबकि जांच दल के अधिकारियों के अनुसार महेंद्र गोदाम प्रभारी का सहयोगी था और उसे पूरे मामले की जानकारी है।
मीराभवन स्थित पीसीएफ गोदाम की जांच के लिए पहुंचे अधिकारी। संवाद- फोटो : PRATAPGARH