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प्रतापगढ़ : गायक बनने का सपना छोड़कर आठ साल बाद ड्यूटी पर लौटा सिपाही

Wed, 02 Nov 2022 01:15 AM IST
इलाहाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, प्रतापगढ़

सार

बांदा निवासी प्रेमनारायण का तबादला महोबा जनपद से वर्ष 2014 में प्रतापगढ़ पुलिस लाइन के लिए हुआ था। बताया गया कि वह प्रतापगढ़ में ड्यूटी करने नहीं आया। विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों के संज्ञान में मामला आया तो इसकी जांच शुरू हो गई।
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आठ वर्ष बाद डियूटी पर लौटा सिपाही प्रेमनारायण एसपी सतपाल अंतिल के सामने पेश हुआ। संवाद - फोटो : PRATAPGARH
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विस्तार
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वर्ष 2014 यानी करीब आठ साल से ड्यूटी से गैरहाजिर सिपाही की साफगोई उसकी ढाल बन गई। कुमार शानू की गायकी का दीवाना सिपाही मायानगरी मुंबई चला गया। वहां भटका, बीमार हुआ फिर विभाग ने खोजबीन और जांच शुरू की तो लौट आया। मंगलवार को वह एसपी के सामने पेश हुआ। पहले साहब को घुमाया फिर सच्चाई बताई। उनकी फरमाइश पर एक गाना भी सुनाया। मातहत की सुरीली आवाज सुनकर पसीजे एसपी ने उसे आमद कराने का आदेश दे दिया।

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बांदा निवासी प्रेमनारायण का तबादला महोबा जनपद से वर्ष 2014 में प्रतापगढ़ पुलिस लाइन के लिए हुआ था। बताया गया कि वह प्रतापगढ़ में ड्यूटी करने नहीं आया। विभागीय कर्मचारियों व अधिकारियों के संज्ञान में मामला आया तो इसकी जांच शुरू हो गई।


प्रतापगढ़ पुलिस की ओर से सिपाही प्रेमनारायण के विषय में जानकारी के लिए कई पत्राचार विभागीय कार्यालय व परिजनों को किया गया। एक माह पहले अचानक ड्यूटी से गैरहाजिर सिपाही प्रतापगढ़ पुलिस के अफसरों को सूचना देकर काम करने की इच्छा जताई। एसपी ने आठ साल बाद ड्यूटी करने आए सिपाही प्रेमनारायण की जांच सीओ लाइन को सौंपी थी।

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मंगलवार को सिपाही प्रेमनारायण ने एसपी कार्यालय पहुंचकर अपना परिचय दिया। एसपी ने सीओ लाइन से जानकारी लेने के बाद सिपाही के आठ साल तक गायब रहने के बारे में जानकारी ली, फाइल भी देखी। सिपाही पहले तो एसपी को घुमाने की कोशिश करता रहा मगर बाद में हकीकत बयां कर दी। उसने साथ ड्यूटी करने वाले पांच सिपाहियों को भी गवाह के रूप में लाकर एसपी के सामने खड़ा किया गया था।


प्रेमनारायण ने एसपी को बताया कि वह वह कुछ दिनों तक मुंबई में गीत गाने की तैयारी कर रहा था। मशहूर गायक कुमार शानू की तरह गीत गाने का सपना देखा था। गीत गाने की तैयारी के दौरान मुंबई में उसकी तबीयत खराब हो गई थी। दो साल तक उपचार के बाद उसकी हालत में सुधार हुआ तो वह महोबा पुलिस लाइन गया। आपबीती सुनाई, लिखापढ़ी की, लेकिन उसकी मदद नहीं हुई। उसके बाद से वह भटक रहा था।
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