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जिले में 67.12 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित होगा कारखाना

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नौनिहालों को पौष्टिक आहार मुहैया कराने के लिए जिले में 67.12 करोड़ रुपये की लागत से कारखाना स्थापित करने की तैयारी हो रही है। आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीरी की सप्लाई बंद होने के शासन ने अब जिले में ही ऐसे कारखाने लगाने की मंजूरी दी है। विभागीय अधिकारियों ने जमीन की तलाश शुरू कर दिए हैं।
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जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों पर पोषाहार की आपूर्ति बंद हो गई है। शासन ने इस वर्ष किसी भी ठेकेदार को टेंडर ही नहीं दिया है। 29 साल बाद ऐसा हुआ है, जब पोषाहार का टेंडर ठेकेदारों को नहीं दिया गया है। नौनिहालों को पौष्टिक आहार देने के लिए अब अफसरों की देखरेख में जिले में ही आहार तैयार कराया जाएगा और समूहों के माध्यम से केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा।
शासन ने जिले में कारखाना का निर्माण करने के लिए 67.12 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी है, जो एक अप्रैल के बाद स्थल चयन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। दरअसल शासन की मंशा है कि जिले में तैयार होने वाले पोषक आहार की गुणवत्ता बेहतर होगी और स्थानीय स्तर पर ही शिकायतों का निस्तारण किया जा सकेगा।
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जिले 3259 केंद्रों को ही सप्लाई करना होगा, ऐसे में पौष्टिक आहार देर से आने, नहीं मिलने की समस्या भी खत्म हो जाएंगी। जिले में ऐसा पहली बार होगा जब इतना बड़ा कारखाना लगने जा रहा है और वह सिर्फ जिले के लोगों के उपयोग में आएगा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वह स्थल का चयन करें और कारखाने स्थापित करके जिले के केंद्रों तक राशन पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाएं।
बेरोजगारों को मिलेगा रोजगार
जिले में कारखाने की स्थापना होने से बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा और बच्चों को नियमित रुप से पौष्टिक आहार मिलेगा। हालांकि अभी इस राह में बहुत रोड़े हैं। मगर देखना है कि कब तक मूर्त रुप लेता है।
जिले के 3259 आंगनबाड़ी केंद्रों को प्रतिमाह पोषक आहार की सप्लाई करनी है। इसके लिए बड़ा प्लांट लगाने की तैयारी हो रही है। नए वित्तीय वर्ष में इसमें तेजी आएगी और मुख्यालय से ही सभी केंद्रों को पौष्टिक आहार सप्लाई किया जाएगा।
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ओपी यादव, डीसी, स्वत: रोजगार
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