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आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाने में रुचि नहीं ले रहे राज्य कर्मचारी

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State employees not taking interest in getting Ayushman Golden Card
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी बीमा योजना के तहत आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनवाने में राज्य कर्मचारी रुचि नहीं ले रहे हैं। जिम्मेदार अफसर भी चुप्पी साधे बैठे हैं, जबकि शासन ने तीन माह पहले सभी कर्मचारियों को बीमा योजना के तहत कार्ड बनवाने का निर्देश दिया था। जिले के 20 हजार राज्य कर्मचारियों में से महज एक हजार ने आनलाइन आवेदन किया है। इनमें सबसे ज्यादा न्यायालयकर्मी हैं।
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राज्य कर्मचारियों के बीमार होने पर उनके इलाज का खर्च सरकार उठाती है। इलाज कराने के बाद कर्मचारी बिल अपने विभाग में जमा करते हैं। सरकारी दर पर उनके बिल का भुगतान किया जाता है। हालांकि इसमें भी जमकर खेल किया जाता है। कर्मचारी जहां डॉक्टर से मिलकर खर्च से दोगुना बिल विभाग में जमा करते हैं वहीं, अफसर भी कमीशन लेकर बिल का भुगतान कर देते हैं।
इस खेल पर विराम लगाने के लिए योगी सरकार ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी बीमा योजना की शुरुआत की है। आम लोगों की तरह राज्य कर्मचारियों को भी गोल्डन कार्ड जारी कर बीमार होने पर आयुष्मान भारत योजना से संबद्ध अस्पतालों में कैैशलेस इलाज किया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग के एक अफसर ने बताया कि जिले में करीब 20 हजार राज्य कर्मचारी हैं।
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इनको राज्य कर्मचारी बीमा योजना के तहत आयुष्मान गोल्डन कार्ड निर्गत किए जाने हैं। कार्ड बनवाने के लिए सभी विभागों के मुखिया को एक आईडी और पासवर्ड दिया गया है। जिस पर कर्मचारियों का ब्यौरा तैयार कर उनका आनलाइन आवेदन करना है। कर्मचारियों के साथ ही उनके परिवार के सदस्यों के भी नाम दर्ज करने हैं। राज्य कर्मचारी इस योजना की ओर रुचि नहीं ले रहे हैं।
रिटायर्ड कर्मचारियों को भी योजना में किया जाएगा शामिल
रिटायर्ड कर्मचारियों को भी पंडित दीनदयाल राज्य कर्मचारी बीमा योजना में शामिल किया जाएगा। जिससे बीमार होने पर वे भी पांच लाख रुपये तक अपना इलाज करा सकें। हालांकि प्रचार-प्रसार के अभाव में रिटायर्ड कर्मचारियों को अभी इस योजना के बारे में बहुत कम जानकारी है।
जिले के करीब एक हजार लोगों ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस इलाज के लिए अपना पंजीयन कराया है। इनमें ज्यादातर न्यायालय कर्मचारी हैं। अन्य विभागों के अफसरों के पास पत्र भेजकर डाटा मांगा गया है।
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डॉ. सुधाकर सिंह, प्रोग्राम मैनेजर, आयुष्मान भारत
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