एक वारदात, चार एफआईआर
तिहरे हत्याकांड में चार एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। एक एफआईआर प्रधान नन्हे यादव की हत्या की थी। दूसरी एफआईआर पुलिस पर हमले की थी। तीसरी एफआईआर नन्हे यादव के भाई सुरेश यादव के हत्या की और चौथी एफआईआर सीओ जिया उल हक के हत्या की थी। तत्कालीन थानाध्यक्ष मनोज शुक्ला की तरफ से प्रधान नन्हें यादव के भाइयों और बेटों समेत 10 लोगों को नामजद किया गया। इसमें राजा भैया के प्रतिनिधि हरिओम शंकर श्रीवास्तव, चेयरमैन गुलशन यादव, राजा भैया के चालक रोहित सिंह और गुड्डू सिंह भी शामिल थे। सीबीआई ने राजा भैया, गुलशन यादव, हरिओम, रोहित, संजय को क्लीन चिट दे दी। राजा भैया को पॉलीग्राफ टेस्ट से भी गुजरना पड़ा था।
पिता बोले- जीते जी इंसाफ मिल जाए तो कलेजे को मिले ठंडक
मेरा बेटा पढ़ने में होनहार था। चौक-चौराहे के स्कूल से पढ़ाई करने के बाद जब नौकरी मिली तो आस जगी कि परिवार की मुश्किलें खत्म हो जाएंगी। पर बेटे की हत्या के बाद परिवार बर्बाद हो गया। रात को सोता हूं तो उसका चेहरा याद आता है। दस साल बाद भी उसके कातिलों को अभी तक सजा नहीं हुई, इसका मुझे मलाल है। जीते जी बेटे के कातिल को सजा हो जाए, यही मेरी आखिरी ख्वाहिश है। यह दर्द खुखुंदू थाना क्षेत्र के जुआफर गांव निवासी जियाउल हक के पिता शमशुल हक का है।
उन्होंने कहा कि कुंडा की घटना में रघुराज प्रताप सिंह का हाथ है, हमें यह पूरा यकीन है। निष्पक्ष जांच कर आरोपपत्र दाखिल हो और आरोपियों को सजा मिले। वर्तमान में सीओ के माता-पिता की जिम्मेदारी उनके दूसरे बेटे शोहराब अली पर है, जो गोरखपुर एडीजी ऑफिस में तैनात हैं। अब स्पेशल मजिस्ट्रेट सीबीआई लखनऊ की अदालत में फिर से राजा भैया सहित अन्य पर दर्ज केस की विवेचना सीबीआई करेगी।