देर रात हो सकी शवों की शिनाख्त
जहां डाक्टरों ने श्रवण कुमार शर्मा, यूसुफ और दीपक को मृत घोषित कर दिया। रात में पुलिस ने दीपक की पहचान लकी के रूप में की थी। हालांकि देर रात में उसकी शिनाख्त हो सकी। खबर मिलते ही उनके घरों में कोहराम मच गया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद परिजन शव लेकर घर पहुंचे। परिवार के लोगों की चीत्कार से हर किसी की आंखों से आंसू बहने लगे। मृतक श्रवण चार भाइयों में तीसरे नंबर पर था। तीन बहनें सीता, नीलम, सुधा हैं। जिनकी शादी हो चुकी है। श्रवण की अभी शादी नहीं हुई थी।
मृतक यूसुफ घर पर रहकर परिवार के लोगों के काम में हाथ बंटाता था। वह प्रधानी का चुनाव भी लड़ चुका था। उसके व्यवहार का हर कोई कायल था। युसूफ की मां जरीना बानो का रो-रोकर बुरा हाल है । दीपक के पिता इंदल वर्मा का निधन हो चुका है। उसकी मां पतरका व भाई अमर बहादुर और चचेरे भाई सूरज समेत परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल रहा।
कंधई पुलिस ने बताया कि सफारी कार चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। कार को कब्जे में लेने के दौरान उसमें शराब की बोतलें भी मिलीं। श्रवण व यूसुफ के परिवार के लोग परदेश में रहते हैं। उनके आने के बाद शनिवार को दोनों का अंतिम संस्कार किया जाएगा। जबकि दीपक के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
श्रवण को देखने के लिए आने वाले थे मेहमान
परिवार के लोगों के अनुसार शुक्रवार को श्रवण को देखने के लिए लड़की पक्ष के कुछ लोग आने वाले थे। इसकी घर में तैयारी भी कर ली गई थी। मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था। हर कोई श्रवण, यूसुफ समेत अन्य दोस्तों के व्यवहार की तारीफ करते नजर आए।
लकी के लिए यूसुफ बन गया फरिश्ता
ननिहाल बंधवा बाजार बाइक से जा रहे श्रवण के साथ उसका दोस्त लकी सिंह भी जाने के लिए तैयार हो गया। मगर बाजार में श्रवण के साथ बाइक पर सवार होकर यूसुफ पहुंचा। लकी सिंह से दोनों बात करने लगे। बोले कि अभी दीपक को लेने के लिए शहर जाना है। तीन लोग कैसे साथ चलेंगे। मगर लकी मान नहीं रहा था। तब यूसुफ उसे मना करते हुए कहा कि वे लोग दीपक को लेकर आते हैं तो फिर एक साथ चलेंगे। मगर तीनों लकी को लेने के बजाय बंधवा बाजार चले गए।
रोकती रही मां, मगर खींच ले गई मौत
नगर कोतवाली के भंगवा का रहने वाला दीपक वर्मा साथी श्रवण का रिश्ता तय होने की बात कहते हुए घर से निकलने लगा। तब उसकी मां पतरका उसे रोकने लगी। बोली कि शुक्रवार को रिश्ता तय होगा। वह कल चला जाए। अभी जाने की कौन सी जरूरत है। मगर उसने मां की बात नहीं मानी। आखिरकार उसकी मौत उसे साथियों के साथ खींच ले गई।