प्रतापगढ़ के कंधई थाना क्षेत्र के रतनमई गांव निवासी लोकपति त्रिपाठी के मुताबिक, उन्होंने मुंबई के अश्विन गिरिराज कुमार अग्रवाल के साथ व्यावसायिक लेन-देन प्रारंभ किया। अश्विन ने लोकपति को पहली बार 30.50 करोड़ और दूसरी बार में 40 लाख का चेक दिया। दोनों चेक बैंक में लगाने के बाद हस्ताक्षर में अंतर होने के कारण बाउंस हो गए।
चेक बाउंस के एक मामले में प्रतापगढ़ की कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। मामले में नौ साल बाद स्पेशल जज मोनिका ठाकुर ने सीजेएम कोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए आरोपी को 33. 48 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने आरोपी की दलीलों को नहीं माना और पीड़ित को धनराशि का भुगतान करने के लिए कहा है।
विज्ञापन
जिले के कंधई थाना क्षेत्र के रतनमई गांव निवासी लोकपति त्रिपाठी के मुताबिक, उन्होंने मुंबई के अश्विन गिरिराज कुमार अग्रवाल के साथ व्यावसायिक लेन-देन प्रारंभ किया। अश्विन ने लोकपति को पहली बार 30.50 करोड़ और दूसरी बार में 40 लाख का चेक दिया। दोनों चेक बैंक में लगाने के बाद हस्ताक्षर में अंतर होने के कारण बाउंस हो गए।
इसकी जानकारी देने के बाद अश्विन ने रुपये देने से हाथ खड़े कर दिए। इस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद सीजेएम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए अश्विन गिरिराज कुमार अग्रवाल को दोषी पाते हुए 33.45 करोड़ रुपये का भुगतान करने और दो वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। अश्विन ने एडीजे कोर्ट में अपील दायर की। स्पेशल जज मोनिका ठाकुर ने जुर्माने के साथ ही जेल की सजा को बरकरार रखा है।