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प्रतापगढ़: स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ी आयुष्मान भारत योजना

Mon, 03 Jun 2019 12:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
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आयुष्मान भारत योजना
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जिले में स्वास्थ्य विभाग के अफसर आयुष्मान भारत योजना को पलीता लगा रहे हैं। योजना के तहत अभी तक 58 हजार लोगों को ही गोल्डेन कार्ड जारी किया जा सका है। जबकि इसके लिए एक लाख 76 हजार लोग पात्र हैं। पीएमओ कार्यालय से गोल्डेन कार्ड जारी करने के लिए आए एक लाख 76 हजार पत्रों को भी जिम्मेदार लोगों ने गायब कर दिया। इसके चलते मरीजों को योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
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केंद्र की मोदी सरकार ने 25 सितंबर 2018 को आयुष्मान भारत योजना का शुभारंभ किया था। वर्ष 2011 में हुई आर्थिक सामाजिक जनगणना के आधार पर जिले के 1 लाख 76 हजार हजार परिवारों को इसमें शामिल किया गया। इस योजना के तहत प्रत्येक परिवार का पांच लाख रुपये तक कैशलेश उपचार होना है।

मगर स्वास्थ्य विभाग के अफसर इस योजना को पलीता लगा रहे हैं। वह आयुष्मान भारत योजना के पात्रों का गोल्डेन कार्ड बनवाने से कन्नी काट रहे हैं। सरकारी अस्पताल के चिकित्सक खुद ही मरीजों को भर्ती करने से कतरा रहे हैं। जबकि केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि पात्रता सूची में जिन लोगों के नाम शामिल हैं, चिकित्सक पहले उन्हें भर्ती कर इलाज शुरू कर देंगे।
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बाद में गोल्डेन कार्ड खुद जारी करेंगे। मगर बेल्हा में इसके विपरीत हो रहा है। जिले के सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान भारत योजना शुरू होने के बाद से अब तक महज 297 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया है। वहीं प्राइवेट अस्पताल में देखा जाए तो नौ माह के भीतर 131 मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया है।

मजेदार बात यह है कि 1 लाख 76 हजार परिवार को पात्रता की दायरे में लिया गया। मगर इनमें से महज 57 हजार परिवार का ही अब तक गोल्डेन कार्ड जारी किया जा सका है। बाकी लोग गोल्डेन कार्ड बनवाने के लिए भटक रहे हैं। 

सीएचसी और पीएचसी से गायब हो गया पीएमओ कार्यालय से आया संदेश 
आयुष्मान भारत के योजना के तहत पात्र मरीजों को पीएमओ से संदेश भेजा गया था। इस पत्र के साथ पात्र मरीज अपना एक पहचान पत्र दिखाकर किसी भी सरकारी या फिर स्वास्थ्य विभाग की ओर से चयनित अस्पताल में इलाज करवा सकता था।

मगर इस संदेश पत्र को सीएचसी और पीएचसी से गायब कर दिया गया। आशा बहू या फिर एएनएम के माध्यम से गांव-गांव वितरित नहीं कराया गया। जिसके चलते आज भी एक लाख 19 हजार लोगों का गोल्डेन कार्ड नहीं बन पाया।

कार्ड वितरण करने और मरीजों के इलाज करने में सबसे पीछे मानधाता सीएचसी
मरीजों को गोल्डेन कार्ड जारी करने के साथ उन्हें भर्ती कर इलाज करने में मानधाता, बेलखरनाथ और लक्ष्मणपुर सीएचसी सबसे पीछे हैं। इन तीनों अस्पतालों में नौ माह के अंदर एक-एक मरीजों को भर्ती कर इलाज किया गया है। 

इन अस्पतालों में नौ माह में इतने मरीजों का हुआ इलाज
जिला अस्पताल       105
महिला अस्पताल       52
मानधाता                1
बेलखरनाथ             1
लक्ष्मणपुर                1  
संडवाचंद्रिका            6 
बाघराय                  6
कोहड़ौर                17
कुंडा                    16
सांगीपुर                 12
संग्रामगढ़                5 
रानीगंज                  4
गौरा                      3
बाबूगंज                  3 
अमरगढ़                  2
पट्टी                       3 
रूमा नर्सिंग होम        76
संजीवनी नर्सिंग होम    45
संतनू    नर्सिंग होम     10

दो अस्पतालों का अटैचमेंट खत्म 
अंसारी व मदर अस्पताल में नौ माह में एक भी मरीजों का इलाज नहीं किया गया। जिसके चलते दोनों अस्पताल का अटैचमेंट खत्म कर दिया गया। 
एमओ कार्यालय से आए पत्र को पात्रों के घर भेजवा दिया गया है।

यदि आशा बहू नहीं पहुंचाई हैं तो इसकी जांच करवाकर उनके खिलाफ कार्रवाई करने के लिए सीएमओ से बात की जाएगी। जो सीएचसी और पीएचसी अधीक्षक योजना को फ्लाप करने में जुटे हैं, उनके खिलाफ शासन को पत्र भेज जाएगा। 
डॉक्टर सुधाकर सिंह, प्रोग्राम मैनेजर, आयुष्मान भारत।

57 हजार लोगों ने आयुष्मान भारत योजना के तहत गोल्डेन कार्ड सरकारी अस्पतालों से बनवाए हैं। बाकी लोग जन सेवा केंद्र से बनवा रहे हैं। किसी पर दबाव नहीं डाला जा सकता है कि वह सरकारी अस्पताल में बनवाएं या फिर भर्ती होकर इलाज कराएं। पीएमओ कार्यालय से आए पत्रों को गायब करने की जांच कराई जाएगी।  एके श्रीवास्तव, सीएमओ।
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