लोकसभा चुनाव से ऐन पहले सपा को जोर का झटका लगा है। तेजी से बदले सियासी घटनाक्रम के तहत शनिवार को सियासत में बड़ा उलटफेर हो गया। चुनाव के पहले पिता और मिर्जापुर के पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल के कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनके बेटे पट्टी के पूर्व विधायक और सपा के जिलाध्यक्ष राम सिंह पटेल ने भी कांग्रेस का दामन थाम लिया।
सपा के जिलाध्यक्ष और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने दिल्ली में प्रियंका गांधी की उपस्थिति में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण कर ली। इस राजनैतिक उठापटक के बाद राजनैतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई। राम सिंह के जाने के बाद सपा को प्रतापगढ़ में बड़ा नुकसान हुआ है।
दस्यु सरगना ददुआ के भतीजे राम सिंह पटेल ने सपा से ही अपनी राजनीतिक पारी शुरू की। राम सिंह के पिता बालकुमार पटेल भी सपा से ही मिर्जापुर से सांसद रह चुके हैं। पट्टी विधानसभा से 2012 में रामसिंह विधायक चुने गए। इस बार 2017 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने वाले पूर्व विधायक राम सिंह को सपा ने जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी। लोकसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच गुरुवार को सपा के पूर्व सांसद बालकुमार पटेल ने कांग्रेस का दामन थाम लिया।
कांग्रेस ने बाल कुमार को बांदा से प्रत्याशी घोषित कर दिया। पिता के कांग्रेस में शामिल होने के बाद पूर्व विधायक व सपा जिलाध्यक्ष राम सिंह ने सपा से इस्तीफा देते हुए शनिवार को कांग्रेस का दामन थाम लिया। इस उलटफेर के बाद जिले का सियासी माहौल अचानक गर्मा उठा। सपाई नुकसान की भरपाई की काट खोजने में जुट गए। वहीं कांग्रेस खेमे में खुशी देखने को मिली। राम सिंह के कांग्रेस में शामिल होने के बाद सपा-बसपा गठबंधन को जोर का झटका लगा है। फिलहाल सपा खेमे में सियासी घटनाक्रम को लेकर कई पार्टी के पदाधिकारी लखनऊ बुला लिए गए।
सपा से टिकट न मिलने पर बाल कुमार ने उठाया कदम
लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए पूर्व सांसद व सपा नेता बालकुमार पटेल पार्टी नेतृत्व से टिकट की मांग कर रहे थे। वह बांदा या मिर्जापुर से टिकट की मांग कर रहे थे। सपा-बसपा गठबंधन के बाद बदले हालात में पार्टी नेतृत्व पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल को किसी भी सीट पर एडजस्ट नहीं कर सका। बस इसी बात को लेकर बालकुमार की नाराजगी सपा नेतृत्व से हो गई। देखते ही देखते कल तक सपा के लिए समर्पित रहने वाले बाल कुमार पटेल कांग्रेस में शामिल हो गए। पिता के बाद राम सिंह ने भी कांग्रेस का दामन थामने में विलंब नहीं किया।
बांदा से बेल्हा तक गरमाया सियासी माहौल
सपा से मोह त्यागकर कांग्रेस का दामन थामने वाले पूर्व सांसद बाल कुमार पटेल के बाद उनके बेटे पूर्व विधायक राम सिंह भी अंतत: पिता के साथ चले गए। तेजी से बदले घटनाक्रम के बाद बांदा से लेकर बेल्हा तक सियासी माहौल गरमाया रहा। दस्यु सरगना ददुआ के भाई व भतीजे की बांदा, चित्रकूट, रायबरेली व प्रतापगढ़ में गहरी पैठ है। अचानक बदले सियासी घटनाक्रम से राजनैतिक गलियारों में नफा नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है।
सपा के साथ लंबे समय तक जुड़े रहने वाले बाल कुमार पटेल ने प्रतापगढ़ में पट्टी विधानसभा से वर्ष 2007 में विधानसभा का चुनाव लड़ा। बहुत कम मतों से वह चुनाव हारे। भाजपा के मोती सिंह ने उन्हें परास्त किया। सपा ने वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में मिर्जापुर से बालकुमार को मैदान में उतारा। वह चुनाव मैदान में उतरे और जीत कर संसद पहुंचे। भले ही वह सांसद बन गए, लेकिन जिले से उनका लगाव खत्म नहीं हुआ। अक्सर उनका आना-जाना लगा रहा।
पट्टी विधानसभा से उनका बेहद लगाव रहा। जिले में गहरी पैठ के चलते उनके बेटे राम सिंह पटेल ने 2012 के विधानसभा का चुनाव जीतकर पिता की हार का बदला लिया था। बांदा, चित्रकूट से लेकर प्रतापगढ़ तक बालकुमार की गहरी पैठ किसी से छिपी नही है। बालकुमार के कांग्रेस में जाने के बाद बांदा से लेकर बेल्हा का सियासी माहौल गरमा हो उठा है। हर कोई कांग्रेस के नफा नुकसान को लेकर चर्चा करता नजर आ रहा है।