लोकसभा चुनाव में इस वर्ष चुनाव आयोग की नजर महिला मतदाताओं पर टिकी है। जिले में कुल 23,48,602 मतदाता हैं, जिसमें 10,89,307 महिला और 12,59,032 पुरुष हैं। 263 अन्य मतदाता हैं। अभी तक हुए लोकसभा के चुनाव में सबसे अधिक वर्ष 2009 में 47.48 प्रतिशत महिलाओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। जिला प्रशासन इस वर्ष महिलाओं को मताधिकार के लिए प्रेरित करने का विशेष अभियान चलाने की तैयारी कर रहा है।
जिले में छह और बार 12 मई को मतदान है। चुनाव आयोग का मानना है कि महिलाएं अपने दायित्व के प्रति अधिक जिम्मेदार होती हैं और वह चुनाव के दिन प्राय: घर पर ही रहती हैं। ऐसे में अगर महिलाओं को जागरूक किया जाए तो मतदान के प्रतिशत में बढ़ोतरी हो सकती है। महिलाओं की तादाद अधिक होने के बावजूद वह मतदान में हिस्सा लेने से वंचित रह जाती हैं।
खासकर वह महिलाएं मतदान नहीं कर पाती हैं, जिनके परिवार रूढ़िवादिता में जकड़े हुए हैं। घर की बुजुर्ग महिलाएं आज भी मतदान के दिन बूथ तक जाना उचित नहीं समझती। यही वजह है कि पूर्व के वर्षों में महिलाओं के मतदान का प्रतिशत बेहद कम रहा है। पुरुषों की अपेक्षा एक या दो प्रतिशत मतदान में कमी नहीं है, बल्कि पांच से छह प्रतिशत कम महिलाएं मतदान में हिस्सा लेती हैं।
लोकसभा चुनावों में महिला-पुरुष मतदान का प्रतिशत
वर्ष महिला पुरुष
1996 45.99 54.1
1998 38.96 61.3
1999 40.66 59.33
2004 39.23 46.29
2009 47.48 52.51
मतदान के लिए महिलाओं की अलग लगेगी कतार
बूथ पर महिलाओं के आने और जाने के लिए अलग से रास्ता होगा। इसलिए बूथ पहुंचने पर उन्हें अपनी बारी की प्रतीक्षा नहीं करनी होगी। नई नवेली दुल्हनों को भी बूथ तक ले जाने के लिए प्रेरित करने की तैयारी है।
महिलाएं अपने दायित्व के प्रति अधिक सजग होती हैं। इसलिए मतदान के लिए महिलाओं को बूथ पर पहुंचकर मतदान के लिए प्रेरित करने का अभियान चलाया जाएगा।
शत्रोहन वैश्य, एडीएम