फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रतापगढ़: दम तोड़ गईं 147 पेयजल परियोजनाएं 

Mon, 03 Jun 2019 12:19 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला ब्यूरो, प्रतापगढ़
विज्ञापन
पेयजल संकट - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
जिले में 147 पेयजल परियोजनाएं मरम्मत और देखरेख के अभाव में दम तोड़ गईं। इनमें पुरानी के साथ नई परियोजनाएं भी शामिल हैं। लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
विज्ञापन


जिन पेयजल परियोजनाओं के रखरखाव का जिम्मा ग्राम पंचायतों को मिला है, वहां धनाभाव के चलते संचालन नहीं हो पा रहा है। जल निगम को भी मरम्मत के नाम पर दो साल से फूटी कौड़ी नहीं मिली है। 

शासन से मरम्मत के लिए धनराशि न मिलने से एक-एक कर पेयजल परियोजना ठप होने लगीं। जिले में कुल 147 पेयजल परियोजनाएं अनुरक्षण अवधि में हैं। इनमें 56 ग्राम पंचायतों को हैंडओवर हो चुकी हैं। महज 14 ग्राम पंचायतों में यूजर चार्ज वसूल किया जा रहा है। जिसमें अधिकांश उपभोक्ता सहयोग नहीं दे रहे।
विज्ञापन


32 ग्राम समूह की परियोजनाएं 30 साल पुरानी होने के चलते जर्जर अवस्था में हैं। एकल ग्राम पंचायत की परियोजनाओं का भी बुरा हाल है। पहले परियोजनाओं की मरम्मत के लिए शासन से हर साल दस से 15 लाख की धनराशि जलनिगम को मिलती थी। वर्ष 2016 के बाद से जलनिगम को मरम्मत के नाम पर फूटी कौड़ी भी नहीं मिली है।

इससे पाइप लाइन की मरम्मत नहीं हो पाती। मोटर खराब होने के बाद उसे बनवाने के लिए विभाग के पास बजट नहीं है। विभाग सरकारी मदद के संकट से जूझ रहा है। जिसके चलते धीरे-धीरे परियोजनाएं बंद होती जा रही हैं। शिकायत के बाद भी विभाग ऐसी परियोजनाओं को दुरुस्त कराने से हाथ खड़े कर दे रहा है।

00 जिले में पेयजल परियोजनाओं का हाल 00
0 147 कुल पेयजल परियोजनाएं जिले में पूर्ण हो चुकी हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश ठप पड़ी हैं। 
0 32 ग्राम समूह की परियोजना 30 साल पुरानी हैं।
0 24 परियोजनाएं ग्राम पंचायतों को हैंडओवर हो चुकी हैं।
0 14 ग्राम पंचायतों मेें यूजर चार्ज वसूला जा रहा है।

अंतू के लोगों की प्यास नहीं बुझा सकी पानी की टंकी
अंतू में वर्ष 2011 लाखों रुपये की लागत से पेयजल परियोजना धरातल पर उतारी गई। नगर पंचायत के अलावा आसपास के गांवों में पानी की सप्लाई के लिए लाइन बिछाई गई। परियोजना बनकर तैयार हुई तो लो वोल्टेज की समस्या आड़े आई। वह दूर हुई तो पंप खराब हो गया। उसकी मरम्मत हुई तो पानी की टंकी लीक होने लगी।

जिससे टंकी में पानी नहीं भर सका। कुछ देर तक ही पानी टंकी में रुकता है। कपासी, बाबूगंज रोड, स्टेशन रोड समेत 15 मोहल्लों में पानी की सप्लाई करने का दावा होता रहा, लेकिन क्षतिग्रस्त पाइप लाइन के चलते मोहल्लों में लगीं पानी की टोटियां सूखी पड़ी हैं। 

लालगंज में वर्षों से ठप है पेयजल परियोजना
लालगंज तहसील क्षेत्र में जलनिगम द्वारा संचालित पेयजल परियोजना सालों से खराब है। तमाम कवायद के भी पेयजल परियोजना शुरू नहीं हो सकी। बाबूगंज बाजार स्थित पानी की टंकी 3 साल से खराब है। जिसे विभाग ठीक नहीं करा पा रहा है।

लालगंज कस्बे में पानी की टंकी साल भर से खराब है। अठेहा, मंगापुर, राजापुर और ननौती में भी पेयजल की परियोजनाएं ठप पड़ी हैं। दलापट्टी में भी पानी की टंकी ने काम करना बंद कर दिया है। जिससे लोगों को गर्मी में पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। इन परियोजनाओं से क्षेत्र के 76 गांवों में पानी की सप्लाई करने का दावा किया गया था। 

36 गांवों में कभी भी ठप हो जाती है पानी की सप्लाई
मानधाता बाजार में पानी की टंकी का निर्माण एक दशक पहले हुआ। जिससे 36 गांवों में पानी सप्लाई होता है। क्षतिग्रस्त पाइप लाइन आए दिन सप्लाई ठप कर देती है। शनिवार की रात पाइप बाजार में फिर क्षतिग्रस्त हो गई।

जिससे संजय नगर तिराहा, भट्ट मार्केट, डाकखाना, जेठवारा रोड पर पानी भर गया। पानी की आपूर्ति ठप होने से लोगों को गर्मी में समस्या का सामना करना पड़ा।

शोपीस बनी है मीराभवन पानी की टंकी
नगर पालिका के मीरा भवन वार्ड में जलनिगम ने एक दशक पूर्व पानी की टंकी का निर्माण कराया। पानी की टंकी बनकर तैयार हुई, लेकिन इसका लाभ शहरियों को नहीं मिल सका। जबकि शहरियों के टैक्स के पैसे से पानी की टंकी का निर्माण हुआ था। टंकी में एक बूंद भी पानी नहीं रुकता। शिकायत के बाद दो बार मरम्मत भी हुई, लेकिन पानी की एक भी बूंद टंकी में रुक नहीं सकी।

वर्तमान में अधिकांश ग्राम पंचायतों में पेयजल आपूर्ति बाधित है। दो साल से अधिक समय से मरम्मत के लिए शासन से धनराशि नहीं मिल सकी। जिसकी वजह से अधिकांश परियोजनाएं बंद होती जा रही हैं। राधेश्याम वर्मा, एक्सईएन, जलनिगम
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें