खेतों में रासायनिक उर्वरकों के अंधाधुंध प्रयोग से मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। जमीन में सल्फर और जिंक जैसे पोषक तत्वों की तेजी से कमी हो रही है। केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री प्रणाम योजना के माध्यम से खेती में वैकल्पिक और प्राकृतिक जैविक उर्वरकों के प्रयोग को बढ़ावा देने की मुहिम शुरू की है। उम्मीद है इस पहल से रासायनिक उर्वरकों का 25 प्रतिशत प्रयोग कम किया जा सकेगा।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2020-21, 2021-22 और 2022-23 में यूरिया, डीएपी समेत सभी रासायनिक उर्वरकों की औसत खपत 113670 मीट्रिक टन रही है। जिसे वर्ष 2025-26 तक कम 99748 मीट्रिक टन तक करने का लक्ष्य रखा है। इस अंतर को पाटने के लिए यूरिया की जगह नैनो यूरिया और डीएपी के स्थान पर नैनो डीएपी को प्रचलन में लाने की कोशिश है।
इस योजना के तहत गांव-गांव किसानों को जागरूक किया जाएगा कि अधिक रासायनिक खाद के प्रयोग से खेतों का क्या नुकसान होगा। बताया जाएगा कि रासायनिक खाद का अधिक प्रयोग करने से लोग अनेक गंभीर बीमारियों का भी शिकार होते हैं। इससे बचने की जरूरत है।
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कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट पर अधिक दिया जाएगा जोर
कंपोस्ट और वर्मी कंपोस्ट पर अधिक प्रयोग करने के लिए किसानों को प्रेरित किया जाएगा। उन्हें बताया जाएगा कि कंपोस्ट से मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ने के साथ ही सेहत के लिए फायदेमंद होगी।
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रासायनिक खादों के अधिक प्रयोग से होने वाले नुकसान की जानकारी किसानों को अभी नहीं है। जब उन्हें इसकी जानकारी होगी, तो वे स्वत: रासायनिक खादों का प्रयोग करना कम कर देंगे । इससे जिले में मांग कम हो जाएगी। उन्हें प्राकृतिक खाद के प्रयोग के लिए जागरूक किया जाएगा।
- अशोक कुमार, जिला कृषि अधिकारी