फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पितृपक्ष आज से , घर- घर होगी पितरों की पूजा

विज्ञापन
कालाकांकर गंगा घाट पर पितरों को तर्पण देते लोग। संवाद - फोटो : PRATAPGARH
विज्ञापन
पितरों को श्राद्ध, तर्पण व पिंडदान कर प्रसन्न करने को लेकर 15 दिनों तक चलने वाला पितृपक्ष मंगलवार से शुरू हो रहा है। पितृपक्ष 6 अक्तूबर तक चलेगा। सोमवार को दिनभर बाजारों में तर्पण, पिंडदान व श्राद्ध के सामानों की खरीदारी की जाती रही।
विज्ञापन

इस बार पितृपक्ष 21 सितंबर से 6 अक्तूबर तक है। पितृपक्ष में पितरों का तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान किया जाता है। मान्यता है कि इसमें पितर देव स्वर्ग लोग से धरती पर परिजनों से मिलने आते हैं। तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान से पितर प्रसन्न होकर सुख समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं। जो पितरों का तर्पण नहीं करता है, उसे पितृदोष लग जाता है। दोष के कारण परिजनों को धन, सेहत और कई तरह की बाधाओं का सामना करना पड़ता है।
पितृपक्ष के एक दिन पूर्व बाजारों में लोग श्राद्ध व तर्पण की तैयारी में जुटे रहे। सोमवार को शहर के बाबागंज, पंजाबी मार्केट, सदर बाजार, घंटाघर, भंगवाचुंगी सहित बाजारों में लोग तिल, कच्चा सूत, मिट्टी के बर्तन आदि की खरीदारी हुई। धर्माचार्य ओम प्रकाश पांडेय व आचार्य आलोक मिश्र ने बताया कि तर्पण व पिंडदान से पितर प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं।
विज्ञापन

तर्पण, श्राद्ध व पिंडदान का क्या है महत्व
पितृपक्ष में श्राद्ध, पिंडदान व तर्पण करने का विशेष महत्व है। हालांकि हर महीने की अमावस्या तिथि पर पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण किया जाता है। मान्यता है कि पितृपक्ष के 15 दिनों में पितर धरती पर किसी न किसी रूप में अपने परिजनों के बीच में रहने के लिए आते हैं। श्राद्ध करने की कुछ खास तिथियां भी होती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें