यात्रियों को रविवार को वाराणसी का सफर महंगा पड़ रहा है। दिन में दो बजे से लेकर रात एक बजे तक पैसेंजर के अलावा दूसरी ट्रेन की सुविधा नहीं है। हालांकि इस दिन नीलांचल एक्सप्रेस है, मगर दो सौ किमी की शर्त लागू होने से वाराणसी का टिकट नहीं बनता है। इससे यात्रियों को काफी दिक्कतें आ रही हैं। सबसे बड़ी वजह लखनऊ-वाराणसी इंटरसिटी एक्सप्रेस का संचालन रविवार को बंद होना है। सप्ताह के छह दिन तो वाराणसी के लिए सफर कोई टेंशन की बात नहीं है। मगर रविवार को यात्रियों की टेंशन बढ़ जाती है। बाकी दिनों में तो लखनऊ से वाराणसी के बीच चल रही इंटरसिटी एक्सप्रेस की सुविधा रहती है। मगर रविवार को यह ट्रेन बंद रहती है। जिससे वाराणसी जाने वाले यात्रियों को काफी दिक्कतें आती हैं। वैसे तो सप्ताह के बाकी दिनों में वाराणसी जाने के लिए रात एक बजे के बाद काशी विश्वनाथ, भोर में पैसेंजर, सुबह इंटरसिटी, दोपहर में जनता और पंजाब मेल शाम को पैसेंजर ट्रेन है।
अगर रविवार की बात की जाए तो इंटरसिटी बंद होेने के बाद केवल वीएल पैसेंजर का ही सहारा बचता है। पैसेंजर का कोई भरोसा नहीं रहता है। अक्सर देर रात को प्रतापगढ़ आती है। उस समय इसका कोई मतलब नहीं रह जाता है। अक्सर यह देखा गया है रविवार को यह भी काफी विलंब से प्रतापगढ़ आती है। हालांकि रविवार को साप्ताहिक ट्रेन नई दिल्ली से पुरी नीलांचल एक्सप्रेस रहती है। मगर उसका वाराणसी का टिकट नहीं बनता है। मजबूरी में जाने वाले यात्री वाराणसी से आगे का टिकट बनवाकर वाराणसी में उतर जाता है। इसके लिए उसको अधिक किराया देना पड़ता है। रेलवे के सूत्रों का कहना है कि इंटरसिटी कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखकर चलाई गई है। रविवार को अवकाश के दिन यह बंद रहती है। यात्रियों का कहना है कि इससे आम लोगों को काफी दिक्कतें आ रही हैं। अगर इंटरसिटी को रविवार को भी चला दिया जाता है तो इसका लाभ यात्रियों को तो मिलेगा ही, रेलवे को भी फायदा पहुंचेगा।