ानीगंज के गाजी क बाग में वन विभाग की नर्सरी में भरा बारिश का पानी। संवाद
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बारिश से पहले जलनिकासी की व्यवस्था न होने से हजारों पौधों पर संकट खड़ा हो गया है। वन विभाग की नर्सरियों में बारिश का पानी जमा होने से हजारों पौधे नष्ट हो गए। अभी भी कई नर्सरियों में बारिश का पानी जमा है। बारिश से पहले यदि जलनिकासी की व्यवस्था की गई होती तो पौधे बर्बाद न होते, मगर इसे लेकर वन विभाग के जिम्मेदार अनजान बने रहे।
जिले में सात वन रेंज हैं। रानीगंज, विश्वनाथगंज, संडवाचंद्रिका, पट्टी, सदर, कुंडा, लालगंज। इसके तहत वन विभाग की 27 नर्सरियां हैं। इन नर्सरियों के जरिए जिले में हरियाली अभियान के तहत पौधरोपण का बड़ा लक्ष्य पूरा किया जाता है। पौधे तैयार किए जाते हैं। इस बार जिले में 42 लाख पौधों को रोपित करने का लक्ष्य था। जिले की नर्सरियों से पौधे तैयार कर अभियान को सार्थक बनाया गया था, मगर बारिश से निपटने के लिए नर्सरियों में कोई व्यवस्था नहीं है। जिले की अधिकांश नर्सरियों में जलभराव की समस्या है।
बृहस्पतिवार को मूसलाधार बारिश से जिले की अधिकांश नर्सरियों में जलभराव हो गया। लगातार दो दिन बारिश से नर्सरियों में हजारों पौधे नष्ट हो गए। नालियों की साफ-सफाई नहीं गई थी। रानीगंज के गाजी का बाग स्थित नर्सरी में बारिश से भीषण जलभराव हो गया। इससे हजारों पौधे नष्ट हो गए। आलम यह है कि तीन दिन बाद भी जलनाॉकासी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इससे पूरे परिसर में भीषण जलभराव है। नए रोपित पौधों का पता नहीं है। जो पौधे अंकुरित होकर थोड़ा बड़े हो गए हैं, वे अब सड़ रहे हैं।
दरअसल, समय रहते कर्मचारियों द्वारा जलनिकासी के लिए नालियां नहीं बनाई गईं। पुरानी नालियां की साफ-सफाई नहीं की गई थी। इससे वह पट गई चुकी हैं। नालियों को बनाने के बजाय वन विभाग के कर्मचारी लापरवाह बने रहे। इसी तरह विश्वनाथगंज, सड़वाचंद्रिका व पट्टी स्थित नर्सरियों में बारिश के दौरान जलभराव के चलते पौधे नष्ट हुए हैं। रानीगंज रेंज के रेंजर अनिल शुक्ला ने बताया कि गाजी का बाग में जलनिकासी न होने से जलभराव हो गया था। शुक्रवार को जलनिकासी के लिए जेसीबी लगाई गई थी। जलभराव से नष्ट होने वाले पौधों का आकलन नहीं किया गया है।