शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए बहुप्रतीक्षित बाईपास का निर्माण अगले माह प्रारंभ होने जा रहा है। गड़वारा बाजार के निकट शुकुलपुर चौराहे के निकट ठेकेदार ने इसके लिए प्लांट लगाया है। जहां गिट्टियों के साथ ही तारकोल डंप किया जा रहा है। अधिकारियों और कर्मचारियों के रहने के लिए वातानुकूलित आवास बनाए जा रहे हैं। बाईपास के निर्माण में 18 माह का वक्त लग सकता है।
जिले में 14 किमी लंबे बाईपास के निर्माण के लिए अब और इंतजार नहीं करना होगा। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के बाईपास निर्माण के लिए हरी झंडी देने के बाद गुजरात की कंपनी मारुति इंफ्राक्रिएशन लिमिटेड ने काम शुरू करा दिया है।
बाईपास निर्माण के लिए केंद्र सरकार ने 240 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया था, मगर टेंडर लेने के लिए ठेकेदारों के बीच हुए खींचतान के चलते 31 प्रतिशत लो टेंडर डालने से अब कार्यदायी संस्था को 166 करोड़ रुपये में बाईपास तैयार करना होगा। वर्ष 2013 में फैजाबाद-प्रयागराज हाईवे के गोड़े गांव से निकलकर पूरे केशवराय होते हुए सुखपालनगर के महकनी मोड़ पर लखनऊ-वाराणसी राजमार्ग में मिलने वाले बाईपास का प्रस्ताव हुआ था।
इसके बाद इसका सर्वे कराया गया। पेड़ों की कटाई और समतलीकरण का कार्य इन दिनों तेजी से चल रहा है। गड़वारा बाजार के निकट शुकुलपुर मोड़ पर कार्यदायी संस्था ने अपना प्लांट लगा दिया है। भारी मात्रा में गिट्टियों के साथ ही तारकोल डंप किया जा रहा है।
चमरौधा नदी पर एक और सई नदी पर बनेंगे दो पुल
चौदह किमी लंबे बाईपास में तीन पुलों का निर्माण होगा। एक पुल चमरौधा, जबकि दो पुल सई नदी पर तैयार किए जाएंगे। बाईपास के जरिए अमेठी-प्रतापगढ़, वाराणसी-लखनऊ और प्रयागराज-फैजाबाद के हाईवे के जुड़ने से शहर में वाहनों की भीड़ कम हो जाएगी। इससे शहरियों को जाम से राहत मिल जाएगी।
सिटी के किसानों को नहीं मिला मुआवजा
बाईपास में टाउन एरिया सिटी के किसानों की भी जमीन अधिग्रहीत की गई है। उन्हें अभी मुआवजा नहीं मिला है। दरअसल, सरकारी दस्तावेजों में अधिकांश किसानों के नाम ही गायब हो गए हैं। इससे अभी इन किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है।
बाईपास निर्माण के लिए प्लांट तैयार हो गया है, अगले माह से निर्माण कार्य प्रारंभ हो जाएगा। कार्यदायी संस्था को 18 माह के अंदर बाईपास का निर्माण करना होगा। एके मिश्र, सहायक अभियंता, एनएच