नायब नाजिर की मौत के बाद हुआ था हंगामा
उनके साथ मौजूद लोगों ने भी सुनील को डंडों से जमकर पीटा था। दूसरे दिन सुनील ने तहसील पहुंचकर एसडीएम पर आरोप लगाते हुए लालगंज कोतवाल को तहरीर दी थी। तहरीर मिलने के बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। जिलाधिकारी के आदेश पर मेडिकल कॉलेज में चिकित्सकीय परीक्षण हुआ। हालांकि हालत खराब होने के बाद दो मार्च को उसे ट्रामा सेंटर लालगंज में भर्ती कराया गया। जहां से दोपहर में मेडिकल कालेज लाया गया।
यहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। इससे आक्रोशित कर्मचारियों ने हंगामा करते हुए गेट पर जाम लगा दिया। कर्मचारियों के दबाव पर रात में ही एसडीएम ज्ञानेंद्र विक्रम व तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद से एसडीएम फरार हो गए। हालांकि सोमवार को कर्मचारियों के प्रदर्शन को देखते हुए शासन ने एसडीएम को निलंबित कर दिया था।
बेटे का दर्ज किया गया था बयान
घटना की बाबत लालगंज कोतवाल ने मृत कर्मचारी सुनील के बेटे सुधीर, होमगार्ड, पंचायतनामा में शामिल लोगों का बयान दर्ज कर लिया। बृहस्पतिवार को पुलिस ने अर्दली किशोरी लाल व चालक उदय कुमार को बुलाकर पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार पूछताछ में दोनों ने बताया कि घटना के समय दोनों अपने घर जा चुके थे। अब पुलिस तहसीलदार, सरकारी परिसर में रहने वाले दूसरे कर्मचारियों के साथ ही इलाज करने वाले चिकित्सकों का बयान दर्ज करने की तैयारी में है।
सुुनील के घर पहुंचे कर्मचारी नेता
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के जिलाध्यक्ष करुणेश प्रताप सिंह मुन्ना बृहस्पतिवार को मृत कर्मचारी सुनील शर्मा के आवास पर पहुंचे। बेटी शिल्पा से बातचीत कर उसे हर संभव मदद का भरोसा दिलाया। बेटी को संगठन की ओर तरफ से 25 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी। उनके साथ अमीन संघ के अध्यक्ष आशुतोष कुमार सिंह, मंत्री हीराल पुष्कर समेत अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान मृत कर्मचारी के बेटे सुधीर शर्मा और अनिल कुमार शर्मा भी मौजूद रहे।